चुनाव प्रचार पर निकलने से पहले मीडिया से बातचीत में तेजप्रताप यादव का दर्द छलक पड़ा. उन्होंने कहा—“लालू जी जननायक थे, लेकिन अब वे राहुल गांधी और तेजस्वी यादव को मार्गदर्शन देते हैं. मुझे वह मार्गदर्शन नहीं मिलता. मेरा मार्गदर्शन बिहार के गरीबों और युवाओं से आता है.”
तेजप्रताप के इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक स्पष्ट संकेत मान रहे हैं कि लालू परिवार में मतभेद अब सतह पर आ चुके हैं. लंबे समय से राजनीतिक छवि में ‘लालू के बड़े बेटे’ के टैग से परेशान दिख रहे तेजप्रताप अब खुद को स्वतंत्र नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश में हैं.
तेजप्रताप ने बिहार चुनाव में चल रहे जननायक के बहस को फिर से सतह पर ला दिया है. इस बहस में उन्होंने बिना किसी का नाम लेते हुए कहा- जो लोग खुद को जननायक कहते हैं, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए. कर्पूरी ठाकुर, डॉ. भीमराव अंबेडकर, राम मनोहर लोहिया और महात्मा गांधी ही सच्चे जननायक थे, जिन्होंने समाज और देश के लिए काम किया.”







