नई दिल्ली: आज रोहित वेमुला की पुण्यतिथि पर, लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने उन्हें याद करते हुए सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा किया। पोस्ट में राहुल गांधी ने रोहित वेमुला की कहानी को दलित युवाओं के संघर्ष और आज के सामाजिक असमानताओं की पहचान के संदर्भ में पेश किया। उन्होंने लिखा कि रोहित वेमुला 10 साल पहले इस दुनिया से चले गए, लेकिन उनके सवाल आज भी प्रासंगिक हैं—क्या इस देश में सपने देखने का हक सबको बराबर है?
राहुल गांधी ने रोहित के संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि पढ़ाई और ज्ञान हासिल करने की चाह रखने वाले इस दलित छात्र को संस्थागत जातिवाद, सामाजिक बहिष्कार और रोज़मर्रा की बेइज्जती ने ऐसा अकेला कर दिया कि उसकी गरिमा छीन ली गई। उन्होंने यह भी बताया कि आज भी दलित युवाओं की हकीकत बदली नहीं है। कैंपस में वही तिरस्कार, हॉस्टल में वही अलगाव, क्लास में वही कमतर समझना और कभी-कभी हिंसा या मौत तक—जातिवाद आज भी शिक्षा संस्थानों में मौजूद है।
राहुल गांधी ने रोहित वेमुला एक्ट लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह न केवल संसद की लड़ाई है, बल्कि कैंपस और युवाओं की लड़ाई भी है। उन्होंने दलित युवाओं से आवाज उठाने, संगठन बनाने और एक-दूसरे के साथ खड़े रहने की अपील की। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि एंटी-डिस्क्रिमिनेशन कानून लागू होना चाहिए, ताकि किसी भी छात्र को उसकी जाति के आधार पर तिरस्कार, बहिष्कार या उत्पीड़न का सामना न करना पड़े।
पोस्ट में उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस सरकारें कर्नाटक और तेलंगाना में इस कानून को लागू करने की प्रक्रिया में हैं और उन्होंने उम्मीद जताई कि पूरा भारत न्यायपूर्ण, समान और मानवीय बनेगा, जहां किसी छात्र को अपने सपनों की कीमत अपनी जान से न चुकानी पड़े।
राहुल गांधी का यह संदेश रोहित वेमुला की याद को सम्मान देने के साथ-साथ दलित युवाओं के अधिकारों और शिक्षा में समानता की लड़ाई को उजागर करता है।







