लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर परिवारवाद और धनबल की राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सपा खुद को समाजवादी और ‘पीडीए’ की पार्टी बताती है, लेकिन उम्मीदवारों के चयन को लेकर उसके फैसलों में अलग तस्वीर दिखाई देती है। मायावती ने यह टिप्पणी सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर सिलसिलेवार पोस्ट के जरिए की।
मायावती ने कहा कि बसपा चुनावों में परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और बड़े पूंजीपतियों को टिकट देने के बजाय गरीब, मध्यम वर्ग और कमजोर तबकों के कार्यकर्ताओं को उम्मीदवार बनाने पर जोर देती है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी चुनाव में धनबल का सहारा नहीं लेती।
बसपा प्रमुख ने सपा के राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन को लेकर भी सवाल उठाए। सपा ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए प्रोफेसर राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी को उम्मीदवार बनाया है। दोनों ने पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया है।
मायावती ने राम गोपाल यादव को सपा प्रमुख के करीबी रिश्तेदार के रूप में संदर्भित करते हुए इसे परिवारवाद से जोड़ा। वहीं, धनराज परिमल नाथवानी को लेकर उन्होंने उनके कारोबारी पृष्ठभूमि का उल्लेख किया और सपा की राजनीति पर सवाल उठाए। उपलब्ध चुनावी हलफनामे के अनुसार नाथवानी ने परिवार की 370 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घोषित की है। वह रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े कॉरपोरेट कार्यकारी हैं।
मायावती ने आरोप लगाया कि सपा चुनाव के दौरान ‘पीडीए’ के नाम पर समर्थन मांगती है, लेकिन सांसद और विधायक पदों के लिए परिवार तथा बड़े पूंजीपतियों को प्राथमिकता देती है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के गरीबों, दलितों, आदिवासियों, अति पिछड़े वर्गों, मुस्लिमों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों से सपा के दावों पर विचार करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सपा का यह राजनीतिक रुख नया नहीं है और पार्टी लंबे समय से इसी तरह काम करती रही है। मायावती ने अपने समर्थकों और बहुजन समाज के लोगों से चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के दावों और उनके उम्मीदवार चयन को ध्यान से देखने की अपील की।
मायावती के इन बयानों पर सपा की ओर से इस खबर में कोई जवाब शामिल नहीं है।







