
मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने मराठा आरक्षण विवाद को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) समुदाय के मुद्दों पर चर्चा के लिए छह सदस्यीय कैबिनेट उपसमिति बनाने का फैसला किया है। इसमें तीनों सत्तारूढ़ दलों से दो-दो मंत्री शामिल होंगे। बता दें कि मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे की मांग थी कि सभी मराठाओं को कुनबी जाति में शामिल किया जाए। कुनबी जाति ओबीसी वर्ग में आती है, जिससे मराठा समुदाय को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण का लाभ मिल सकेगा।
मंगलवार को मनोज जरांगे ने मुंबई के आजाद मैदान में अपना पांच दिन का अनिश्चितकालीन आंदोलन समाप्त कर दिया। उन्होंने सरकार की तरफ से जारी सरकारी प्रस्ताव (जीआर) स्वीकार करते हुए जूस पीकर अपना उपवास तोड़ा। इस दौरान मनोज जरांगे भावुक नजर आए और उन्होंने कहा, ‘आज मराठा समाज की जीत हुई है, यह हमारे लिए दिवाली जैसा दिन है।’ आंदोलन स्थल पर समर्थकों ने गणपति आरती कर खुशी मनाई। राज्य सरकार ने गांव स्तर पर समितियां बनाने और पुराने दस्तावेजों की जांच कर मराठा समुदाय के उन सदस्यों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र देने का निर्णय लिया है, जिनके पास ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद हैं। यह निर्णय हैदराबाद गजेटियर के आधार पर लागू होगा। उपसमिति के प्रमुख राधाकृष्ण विके पाटिल ने जरांगे का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार मराठा समाज की ‘न्यायसंगत मांगों को पूरा करने के लिए सकारात्मक कदम’ उठा रही है।
इस बीच, ओबीसी नेता और मंत्री छगन भुजबल, जो मराठाओं को ओबीसी आरक्षण देने का विरोध कर रहे हैं, बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में शामिल नहीं हुए। उन्होंने साफ कहा- मैं कैबिनेट बैठक में नहीं गया।’ इससे पहले छगन भुजबल ने सोमवार को चेतावनी दी थी कि अगर मराठाओं को ओबीसी कोटे में शामिल कर मौजूदा ओबीसी आरक्षण से छेड़छाड़ की गई तो ओबीसी समुदाय के लोग बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे।
इधर, बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी मराठा आरक्षण मामले की सुनवाई टालते हुए उम्मीद जताई कि अगली तारीख तक कोई ठोस प्रगति होगी। अदालत को अटॉर्नी जनरल ने जानकारी दी कि पुलिस की मदद से सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है और प्रदर्शनकारियों की तरफ से हुए उल्लंघनों की सूची भी सौंपी गई है। वहीं मनोज जरांगे ने अपने समर्थकों से अपील की है कि वे पांच हजार से अधिक संख्या में इकट्ठा न हों और ट्रैफिक में बाधा न डालें।






