
मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव के नतीजों ने महाराष्ट्र की राजनीति की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। 227 वार्डों वाली देश की सबसे अमीर नगर निकाय में भाजपा ने 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने का गौरव हासिल किया है। इसके साथ ही करीब तीन दशक से चला आ रहा ठाकरे परिवार का दबदबा समाप्त हो गया है और भाजपा का 45 साल पुराना मेयर बनाने का सपना साकार होने की दहलीज पर है। चुनाव परिणामों के बाद मुंबई के कई इलाकों में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की तस्वीर वाले “धुरंधर देवेंद्र” पोस्टर लगाए गए, जो भाजपा की जीत के उत्साह और फडणवीस के बढ़ते राजनीतिक कद का प्रतीक माने जा रहे हैं।
नतीजों के अनुसार उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना को 65, एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 29 और कांग्रेस को 24 सीटें मिलीं। एआईएमआईएम ने 8, मनसे ने 6, एनसीपी ने 3, समाजवादी पार्टी ने 2 और शरद पवार गुट की एनसीपी को 1 सीट हासिल हुई। राज्य की 29 महानगरपालिकाओं में से अधिकांश में भाजपा और शिवसेना गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन किया है। पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में भाजपा ने पवार परिवार के प्रभाव को भी कमजोर कर दिया।
प्रदेश की कुल 2,869 सीटों में भाजपा ने 1,441 सीटें जीतकर स्पष्ट बढ़त बनाई। शिंदे गुट को 405, कांग्रेस को 318 और अजित पवार की एनसीपी को 164 सीटें मिलीं। कुछ शहरों में कांग्रेस ने जरूर दम दिखाया—लातूर में 43 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत मिला, जबकि भिवंडी-निजामपुर में 30 सीटें जीतकर कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी। मालेगांव में स्थानीय दल आईएसएलएएम पार्टी 35 सीटों के साथ अव्वल रही।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये नतीजे फडणवीस की रणनीति, महिला-युवा केंद्रित योजनाओं और ट्रिपल इंजन सरकार के भरोसे पर जनता की मुहर हैं। मुंबई समेत अधिकांश निकायों में सत्ता परिवर्तन ने यह संकेत दे दिया है कि महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में भाजपा अब निर्णायक ताकत बन चुकी है।






