
वैशाली : केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने रविवार को बिहार की कानून-व्यवस्था और विपक्षी दलों की रणनीति पर तीखा हमला बोला। वैशाली जिले के हाजीपुर पहुंचे चिराग पासवान ने जहां एक ओर पटना में व्यापारी की हत्या को लेकर नीतीश सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के एक मंच पर आने को ‘राजनीतिक अवसरवादिता’ करार दिया। मीडिया से बातचीत में चिराग पासवान ने महाराष्ट्र की राजनीति पर टिप्पणी कर कहा कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे अपनी राजनीतिक जमीन पूरी तरह खो चुके हैं, और अब अपनी खोई हुई विरासत को बचाने की कवायद में एक मंच पर आ खड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह मंच भाषाई एकता के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए है।
चिराग ने कहा कि बाला साहब ठाकरे की जो विरासत थी, वह दोनों नेताओं ने हाल के वर्षों में खो दी है। अब वे अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को साधने के लिए मतभेद भूल कर मंच साझा कर रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि हमें नहीं पता कि मनभेद खत्म हुए हैं या नहीं, लेकिन दोनों ने एक साथ तस्वीर जरूर खिंचवाई है, और यह तस्वीर राजनीतिक लाभ उठाने का प्रतीक है।नौ जुलाई को घोषित बिहार बंद को लेकर विपक्ष के रुख पर भी चिराग पासवान ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब चुनाव आयोग मतदाता सूची पुनरीक्षण के लिए संवाद करता है, तो विपक्षी दलों के नेता सामने नहीं आते, लेकिन बाद में आयोग पर मनमानी के आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि मैंने अपने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे हर उस व्यक्ति की मदद करें, जिसे वोटर लिस्ट सुधार में दिक्कत हो रही हो। यह एक नियमित प्रक्रिया है जिसमें मृत व्यक्तियों का नाम हटाना और पात्र मतदाताओं का नाम जोड़ना जरूरी होता है। चिराग ने विपक्ष से अपील की कि राजनीतिकरण छोड़कर आम जनता की मदद करें, ताकि लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हो सकें।






