नयी दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के प्रमुख और अलगाववादी नेता यासीन मलिक से जुड़े आतंकी फंडिंग मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। एनआईए ने इस याचिका में यासीन मलिक को दी गई आजीवन कारावास की सजा को मृत्युदंड में बदलने की मांग की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चूंकि यासीन मलिक पहले से ही उम्रकैद की सजा काट रहे हैं और याचिका केवल सजा बढ़ाने से जुड़ी है, इसलिए इसमें किसी तरह की तात्कालिकता नहीं है।
न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर दुदेजा की पीठ ने एनआईए को यासीन मलिक के जवाब पर प्रतिउत्तर दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया। एनआईए की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अक्षय मलिक और खावर सलीम ने दलील दी कि यासीन मलिक ने एजेंसी की याचिका के जवाब में लगभग 70 पन्नों का विस्तृत उत्तर दाखिल किया है, जिसकी समीक्षा के लिए और समय की आवश्यकता है।
वहीं, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए यासीन मलिक ने एनआईए के इस अनुरोध का विरोध किया। उन्होंने कहा कि वह पिछले तीन वर्षों से मृत्युदंड की आशंका को लेकर मानसिक आघात (ट्रॉमा) में जी रहे हैं और मामले में लगातार देरी उनके लिए पीड़ादायक है। हालांकि, एनआईए ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि यासीन मलिक को अपना जवाब दाखिल करने में लगभग एक साल का समय लगा था, जबकि एजेंसी केवल कुछ सप्ताह का अतिरिक्त समय मांग रही है।
अदालत ने एनआईए की दलीलों को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई की तारीख 22 अप्रैल तय कर दी। गौरतलब है कि मई 2022 में एक निचली अदालत ने यासीन मलिक को यूएपीए और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अदालत ने तब यह भी कहा था कि यह मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की श्रेणी में नहीं आता, जिसके बाद एनआईए ने उच्च न्यायालय में सजा बढ़ाने की अपील दायर की थी।







