पीलीभीत (उत्तर प्रदेश): पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के कथित प्रतिबंधित वन क्षेत्र में एक युवती के अपने साथी के साथ फिल्मी गानों पर डांस करने के दो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। पर्यटन सत्र शुरू होने से पहले सामने आए इन वीडियो ने वन्यजीवों की सुरक्षा और प्रतिबंधित क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ा दी है। वन विभाग ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है।
वन विभाग के अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रसारित दोनों वीडियो लगभग 27 और 28 सेकंड के हैं। इनमें एक युवती फिल्मी गानों पर डांस करती दिखाई दे रही है, जबकि उसका साथी कुर्सी पर बैठा नजर आ रहा है। युवती उसे भी अपने साथ डांस करने के लिए प्रेरित करती दिखती है। हालांकि, वीडियो की वास्तविक लोकेशन और इसे रिकॉर्ड किए जाने की परिस्थितियों की अभी पुष्टि नहीं हुई है।
वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
पीलीभीत टाइगर रिजर्व का वन क्षेत्र बाघ, तेंदुए और अन्य वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। वन्यजीवों की सुरक्षा तथा उनके प्राकृतिक वातावरण को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से जंगल के प्रतिबंधित हिस्सों में आम लोगों की आवाजाही पर रोक रहती है। ऐसे में यदि वीडियो वास्तव में प्रतिबंधित क्षेत्र में बनाए गए हैं, तो यह वन नियमों के उल्लंघन का मामला हो सकता है।
पर्यटन सत्र शुरू होने से पहले वीडियो सामने आने के कारण वन क्षेत्र की निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और प्रतिबंधों के पालन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, वीडियो में स्थान की स्पष्ट पहचान नहीं होने के कारण फिलहाल यह निश्चित नहीं है कि इन्हें पीलीभीत टाइगर रिजर्व के किस हिस्से में रिकॉर्ड किया गया।
डीएफओ ने दिए जांच के निर्देश
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) मनीष सिंह ने बताया कि वायरल वीडियो उनके संज्ञान में आए हैं और उनकी जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि वीडियो कहां के हैं, इन्हें कब बनाया गया और किन परिस्थितियों में रिकॉर्ड किया गया, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
डीएफओ के मुताबिक, जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि वन नियमों का उल्लंघन किए जाने की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल वन विभाग वीडियो की सत्यता और वास्तविक स्थान का पता लगाने में जुटा है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रतिबंधित वन क्षेत्र में नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।







