
नयी दिल्ली: संसद के बजट सत्र 2026 के दौरान बुधवार को राज्यसभा और लोकसभा में जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को बोलने की अनुमति न मिलने पर विपक्षी दलों ने तीखा विरोध जताया। बढ़ते शोर-शराबे और नारेबाजी के बीच सरकार ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को बिना विस्तृत बहस के ही पारित करा लिया।
राज्यसभा में कार्यवाही उस समय बाधित हुई, जब खड़गे ने सरकार पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए बोलने की मांग की। विपक्ष का कहना था कि सदन में उनकी बात जानबूझकर नहीं सुनी जा रही है। खड़गे को बोलने से रोके जाने के विरोध में कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के सांसद अपनी सीटों से उठकर वेल में आ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया कि सरकार असहमति की आवाज को दबा रही है और संसद को केवल औपचारिकता बना दिया गया है। वहीं, सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर कार्यवाही बाधित करने और सदन को चलने न देने का आरोप लगाया।
इसी बीच, लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। विपक्ष का आरोप है कि यह प्रस्ताव बिना समुचित बहस के पारित किया गया, जिससे संसदीय परंपराओं को नुकसान पहुंचा है। विपक्षी नेताओं ने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी, किसानों और अर्थव्यवस्था जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा का मौका नहीं दिया गया।
सरकार की ओर से कहा गया कि विपक्ष का लगातार व्यवधान कार्यवाही को सुचारु रूप से चलने नहीं दे रहा था, ऐसे में संसदीय प्रक्रिया के तहत प्रस्ताव पारित किया गया। सत्ता पक्ष ने दावा किया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में सरकार की उपलब्धियों और भविष्य की नीतियों का स्पष्ट रोडमैप रखा गया है।
बजट सत्र के शुरुआती दिनों में ही इस तरह का टकराव सामने आने से संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में संसद में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो सकता है। विपक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि उसे अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया, तो वह सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेगा।






