कुशीनगर। कुशीनगर में नारायणी (गंडक) नदी के एपी तटबंध पर पानी का दबाव बढ़ने के बाद तटबंध टूटने से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि करीब दस दिन पहले तटबंध पर पानी का दबाव बढ़ने के बावजूद समय रहते बोल्डर और मिट्टी की व्यवस्था नहीं की गई। उनका कहना है कि यदि पहले ही जरूरी सामग्री पहुंचा दी जाती तो तटबंध टूटने की स्थिति टाली जा सकती थी।
मुख्यमंत्री के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे के बाद तटबंध की मरम्मत और सुरक्षा कार्यों में तेजी देखी गई। मिर्जापुर के अहिरौली से ट्रकों के जरिए बोल्डर की खेप पहुंचनी शुरू हो गई। इसके अलावा बांध को मजबूत करने के लिए मिट्टी से भरी बोरियां भी मौके पर भेजी जा रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि तटबंध टूटने के बाद जिन कार्यों को प्राथमिकता के साथ किया जा रहा है, उनकी जरूरत पहले से दिखाई दे रही थी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि समय पर कार्रवाई नहीं होने के कारण बाढ़ की स्थिति ने गंभीर रूप ले लिया।
बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों के अनुसार, मुख्यमंत्री के दौरे के बाद प्रशासनिक स्तर पर राहत एवं बचाव गतिविधियों में तेजी आई है। तटबंध के आसपास भारी मात्रा में निर्माण सामग्री पहुंचाई जा रही है और क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत के साथ उसे मजबूत करने का काम किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि तटबंध पर लगातार बढ़ रहे जलदबाव को देखते हुए पहले से सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए थे। उनका कहना है कि समय रहते बोल्डर और मिट्टी उपलब्ध होने पर तटबंध की स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता था।
फिलहाल प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से तटबंध की मरम्मत तथा सुरक्षा के लिए आवश्यक सामग्री जुटाई जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य जारी हैं। स्थानीय लोगों की निगाह अब तटबंध की मरम्मत और भविष्य में जलदबाव से निपटने के लिए किए जाने वाले स्थायी उपायों पर है।







