
नयी दिल्ली: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख Gurmeet Ram Rahim Singh को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने साल 2002 के चर्चित पत्रकार हत्या मामले में उन्हें बरी कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत यानी सीबीआई कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें राम रहीम को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
यह मामला वरिष्ठ पत्रकार Ram Chander Chhatrapati की हत्या से जुड़ा है। छत्रपति सिरसा से प्रकाशित एक अखबार के संपादक थे और उन्होंने डेरा सच्चा सौदा से जुड़े कई विवादित मामलों पर रिपोर्टिंग की थी। अक्टूबर 2002 में अज्ञात हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी थी, जिसके बाद कुछ दिनों बाद उनकी मौत हो गई थी।
इस मामले में लंबे समय तक जांच चली और बाद में Central Bureau of Investigation (सीबीआई) को जांच सौंपी गई। सीबीआई ने 2007 में इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद 2019 में पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने गुरमीत राम रहीम सिंह को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
हालांकि, अब पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सबूतों और दलीलों की समीक्षा के बाद निचली अदालत का फैसला रद्द करते हुए राम रहीम को इस मामले में बरी कर दिया है। राम रहीम के वकील जितेंद्र खुराना ने कहा कि अदालत ने सभी आरोपों से उन्हें मुक्त कर दिया है।
दूसरी ओर, इस फैसले से पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के परिवार को बड़ा झटका लगा है। उनके बेटे अंशुल छत्रपति, जो पिछले करीब दो दशकों से न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं, ने संकेत दिया है कि वे हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं।
राम रहीम को मिली यह राहत उनके समर्थकों के लिए बड़ी खबर है, जबकि पीड़ित परिवार के लिए यह निराशाजनक मोड़ माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या सीबीआई या पीड़ित परिवार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हैं।






