नयी दिल्ली: Rahul Gandhi की किसानों के साथ बैठक को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। संसद कार्यालय में हुई इस मुलाकात में राहुल गांधी ने देशभर के 17 प्रमुख किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से बातचीत की और प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर उनकी चिंताओं को सुना। किसान नेताओं ने आशंका जताई कि यह समझौता भारतीय कृषि क्षेत्र, खासकर मक्का, सोयाबीन, कपास, फल और मेवा उत्पादकों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। उनका कहना था कि इस तरह के व्यापार समझौते से विदेशी उत्पादों की एंट्री बढ़ेगी, जिससे घरेलू किसानों की आय और प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ेगा।
बैठक में शामिल किसान प्रतिनिधियों ने इस मुद्दे पर व्यापक आंदोलन की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका मानना है कि यदि समझौते में पर्याप्त सुरक्षा प्रावधान नहीं किए गए, तो इसका सीधा असर देश के करोड़ों किसानों की आजीविका पर पड़ सकता है। राहुल गांधी ने किसानों की बातों को गंभीरता से सुना और उनके हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास का भरोसा दिलाया।
हालांकि, इस बैठक को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा है। भाजपा ने सोशल मीडिया पर बैठक की एक तस्वीर साझा करते हुए दावा किया कि इसे किसानों की बैठक बताया गया, लेकिन इसमें कांग्रेस के कार्यकर्ता और सहयोगी दलों के नेता मौजूद थे। पार्टी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी किसानों के नाम पर राजनीति कर रहे हैं और जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं।
भाजपा ने यह भी कहा कि इस तरह की गतिविधियां राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा हैं और वास्तविक किसान हितों से इनका कोई संबंध नहीं है। वहीं, कांग्रेस और किसान संगठनों की ओर से भाजपा के आरोपों पर अभी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और किसानों के मुद्दे पर सियासी माहौल और गरमा गया है।







