रामनगर। कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को सार्वजनिक महत्व के कई विषयों पर चर्चा करने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जाना दुखद है। श्री शिवकुमार ने शनिवार को कहा कि श्री गांधी किसानों, व्यवसायों और व्यापक आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित करने वाले प्रमुख आर्थिक और नीतिगत मुद्दों को उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता व्यापार शुल्क और अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों पर उनके प्रभाव के बारे में बात कर रहे हैं । ऐसी नीतियां निर्यात प्रतिस्पर्धा, घरेलू विनिर्माण और ग्रामीण आजीविका को प्रभावित कर सकती हैं। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बदलते स्वरूप को देखते हुए उन्होंने कहा कि संतुलित नीति-निर्माण के लिए ऐसे मुद्दों पर व्यापक संसदीय चर्चा आवश्यक है। उपमुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि श्री गांधी को घरेलू शासन और अंतरराष्ट्रीय नीति दोनों ही मामलों पर खुलकर बोलने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच सशक्त बहस जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि सार्वजनिक महत्व के मुद्दों पर चर्चा को सीमित करने से संस्थागत संवाद कमजोर होता है।
ये टिप्पणियां कर्नाटक में व्यापक राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाक्रमों के बीच आई हैं, जिनमें बेंगलुरु में प्रमुख शहरी अवसंरचना परियोजनाएं शामिल हैं। श्री शिवकुमार ने कहा कि ग्रेटर बेंगलुरु शासन योजनाओं से जुड़ी शहरी प्रशासनिक और चुनावी गतिविधियों से पहले शहर की संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयासों के तहत, मानसून के मौसम से काफी पहले, 5,000 करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं को मार्च या अप्रैल तक पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार बेंगलुरु के तीव्र विस्तार को समर्थन देने के लिए दीर्घकालिक भूमि अधिग्रहण रणनीतियों पर भी काम कर रही है। अधिकारियों को बेंगलुरु के 40 किलोमीटर के दायरे में स्थित भूस्वामियों को विकास के लिए स्वेच्छा से भूमि देने के लिए नई अधिसूचना जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि पहाड़ी या वन सीमावर्ती क्षेत्रों के पास के किसान या निजी विकासकर्ता भाग लेने के इच्छुक हैं, तो अधिकारी दो स्थानों पर लगभग 100 एकड़ भूमि का अधिग्रहण करना चाहते हैं। श्री शिवकुमार ने नागरिक अवसंरचना के संबंध में कहा कि दो लैंडफिल या अपशिष्ट प्रसंस्करण स्थलों की पहचान पहले ही कर ली गई है, जबकि दो और स्थानों का चयन किया जा रहा है ताकि बेंगलुरु की तेजी से बढ़ती आबादी के बीच कचरा प्रबंधन की चुनौतियों का स्थायी समाधान प्रदान किया जा सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान संसद में लोकतांत्रिक स्थान को लेकर जारी बहस के साथ-साथ राज्य सरकार के अवसंरचना विकास और शहरी शासन संबंधी प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करने को दर्शाता है।







