नयी दिल्ली: लोकसभा में बुधवार को भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने सरकार पर राष्ट्रीय हितों से समझौता करने का आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र ने भारत की ऊर्जा और वित्तीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाली नीतियों को अमेरिका के दबाव में लागू किया। उन्होंने सवाल किया, “क्या आपको अपने इस कृत्य पर शर्म नहीं आती? ऐसा लगता है जैसे आपने ‘भारत माता’ को बेच दिया हो।”
गांधी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर एक महाशक्ति युग समाप्त हो रहा है, भू-राजनीतिक संघर्ष बढ़ रहे हैं और ऊर्जा एवं वित्तीय प्रणालियों का दुरुपयोग हो रहा है। इसके बावजूद, केंद्र सरकार ने अमेरिका को ऊर्जा और वित्तीय संसाधनों का दुरुपयोग करने की अनुमति दी, जिससे भारत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब अमेरिका कहता है कि भारत किसी विशेष देश से तेल नहीं खरीद सकता, तो इसका सीधा अर्थ है कि हमारी ऊर्जा सुरक्षा बाहरी दबाव के कारण प्रभावित हो रही है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि अमेरिकी आयात बढ़कर 46 अरब डॉलर से 146 अरब डॉलर हो जाएगा, और औसत शुल्क 3 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गया है, जो भारत के हितों के खिलाफ है। उन्होंने इसे “बेतुका” और असंतुलित व्यापारिक नीति बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री सामान्य परिस्थितियों में भारत को बेचने का विकल्प नहीं अपनाते, लेकिन बाहरी दबाव के कारण उन्हें ऐसा करना पड़ रहा है। उन्होंने संसद में “एपस्टीन फाइलों” का जिक्र करते हुए कहा कि गुप्त दबावों के कारण निर्णय लिए जा रहे हैं।
इस दौरान राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि यह समझौता भारत के हितों की अनदेखी करते हुए अमेरिका के पक्ष में किया गया है और इसे तत्काल पुन: समीक्षा की आवश्यकता है।
कुल मिलाकर, राहुल गांधी ने लोकसभा में केंद्र की व्यापार नीति और अंतरिम समझौते को राष्ट्रीय हितों के खिलाफ ठहराते हुए जोरदार विरोध जताया।







