
नयी दिल्ली: केंद्रीय बजट पर चर्चा के दौरान लोकसभा में उस वक्त माहौल गरमा गया जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे जगदंबिका पाल के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। राहुल गांधी ने संबोधन के दौरान जगदंबिका पाल को “पूर्व कांग्रेसी सदस्य” कहकर टिप्पणी की, जिस पर पाल ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए तंज कसा कि “मेरी सलाह ले ली होती तो आज विपक्ष में नहीं बैठे होते।” यह टिप्पणी सदन में चर्चा का विषय बन गई।
बाद में मीडिया से बातचीत में जगदंबिका पाल ने कहा कि विपक्ष के नेता को अपने शब्दों की मर्यादा और संसदीय भाषा का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या संसदीय लोकतंत्र में इस तरह की भाषा उचित है। पाल ने कांग्रेस सरकार के पूर्व फैसलों का जिक्र करते हुए 2013 में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) से जुड़े समझौते और खाद्यान्न नीति के मुद्दे उठाए। उनका दावा था कि 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस फैसले को पलटते हुए गरीबों के लिए मुफ्त राशन योजना को आगे बढ़ाया।
वहीं, राहुल गांधी ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इस समझौते से भारत की ऊर्जा सुरक्षा, किसानों के हितों और डिजिटल डेटा पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। गांधी ने इसे “आत्मसमर्पण” करार देते हुए कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय हितों से समझौता किया है। मार्शल आर्ट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि बातचीत का अंत “गला घोंटने” जैसा नहीं होना चाहिए।
भाजपा ने इन आरोपों को भ्रामक बताते हुए कहा कि भारत ने कोविड के बाद अपनी अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति में पहुंचाया है। यह मुद्दा अब सियासी बहस का केंद्र बन गया है।






