Home राष्ट्रीय कृषि समझौते पर सियासी संग्राम, किसानों का भारत बंद का ऐलान।

कृषि समझौते पर सियासी संग्राम, किसानों का भारत बंद का ऐलान।

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Political battle over agricultural agreement, farmers announce Bharat Bandh.

नयी दिल्ली। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल द्वारा हाल ही में किए गए अंतरराष्ट्रीय कृषि समझौते हैको लेकर देश की राजनीति और किसान संगठनों में हलचल तेज हो गई है। मंत्री ने सोशल मीडिया पर इस समझौते को “भारत के आर्थिक इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाने वाला” बताते हुए कहा कि यह घरेलू किसानों के हितों की रक्षा करेगा, स्थानीय कृषि को मजबूत बनाएगा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समझौते के तहत आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) खाद्य पदार्थों को अनुमति नहीं दी जाएगी, जिससे किसानों और उपभोक्ताओं के हित सुरक्षित रहेंगे।

किसानों की नाराजगी, भारत बंद का आह्वान
हालांकि, सरकार के दावों के विपरीत कई किसान संगठनों ने इस समझौते पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि यह निर्णय दीर्घकाल में किसानों के हितों के खिलाफ साबित हो सकता है। इसी विरोध के तहत विभिन्न किसान संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बंद का असर देश के कई हिस्सों में देखने को मिल सकता है, विशेषकर कृषि प्रधान राज्यों में। पंजाब और हरियाणा में किसान संगठनों ने सड़कों पर चक्का जाम की चेतावनी दी है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में प्रदर्शन और पुतला दहन की योजना बनाई गई है। अन्य राज्यों में भी मंडियों, बाजारों और परिवहन सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। संभावना है कि मंडियां, ट्रांसपोर्ट, थोक बाजार और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

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सुरक्षा के कड़े इंतजाम
स्थिति को देखते हुए कई राज्य सरकारों ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। संवेदनशील जिलों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जा रही है ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके। किसान संगठनों ने साफ कर दिया है कि जब तक इस समझौते को रद्द नहीं किया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। वहीं सरकार अपने फैसले को किसानों के हित में बताते हुए पीछे हटने के संकेत नहीं दे रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में किसान-सरकार के बीच यह टकराव और गहराने की संभावना जताई जा रही है।

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