
नयी दिल्ली: देश में अप्रैल 2026 में राज्यसभा की 37 सीटें खाली होने जा रही हैं, जिनके लिए 16 मार्च को मतदान होगा। इन सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। संख्या बल के लिहाज से भारतीय जनता पार्टी लगातार राज्यसभा में अपनी स्थिति मजबूत कर रही है, जबकि कांग्रेस और विपक्षी दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्रॉस वोटिंग को रोकना है। पिछले चुनावों में क्रॉस वोटिंग के कारण कांग्रेस को कई संभावित जीत गंवानी पड़ी थी, जिससे इस बार पार्टी अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है।
राज्यसभा चुनाव कांग्रेस और विपक्ष के लिए एकजुटता दिखाने का महत्वपूर्ण अवसर भी माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। कांग्रेस इन चुनावों के जरिए यह संदेश देना चाहती है कि पार्टी और विपक्षी गठबंधन मजबूत और एकजुट हैं।
हरियाणा इस बार राजनीतिक रूप से सबसे संवेदनशील राज्यों में शामिल है। 90 सदस्यीय विधानसभा में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 31 विधायकों का समर्थन आवश्यक है। भाजपा के पास 48 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं। हालांकि, 2022 में कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था, जब उसके उम्मीदवार अजय माकन हार गए थे। इस अनुभव को देखते हुए कांग्रेस इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।
इसी तरह हिमाचल प्रदेश और बिहार में भी राजनीतिक समीकरण जटिल बने हुए हैं। बिहार में पांच सीटों पर चुनाव होना है, जहां एनडीए की मजबूत स्थिति है, जबकि विपक्षी गठबंधन को एकजुट रहकर ही सफलता मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, यह चुनाव न केवल राज्यसभा की संख्या संतुलन को प्रभावित करेगा, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों की ताकत और एकजुटता की भी परीक्षा होगा।






