
प्रयागराज/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम निर्देश दिया है। अदालत ने कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को अपने शैक्षणिक प्रमाणपत्र और नियुक्ति पत्र एक सप्ताह के भीतर संबंधित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) के पास जमा करने को कहा है।
अदालत के निर्देश के अनुसार, शिक्षकों को शैक्षणिक दस्तावेजों के साथ एक नोटरीकृत शपथपत्र भी देना होगा। इसमें शिक्षा विभाग में बीएसए या उससे उच्च स्तर पर कार्यरत अथवा सेवानिवृत्त उनके निकट संबंधियों की जानकारी शामिल करनी होगी। दस्तावेजों के सत्यापन की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को दी गई है।
मामले में अदालत ने नियुक्तियों से जुड़े दस्तावेजों की व्यापक जांच पर जोर दिया। सुनवाई के दौरान शिक्षकों की नियुक्ति में कथित फर्जी प्रमाणपत्रों और एक ही शैक्षणिक दस्तावेज के आधार पर कई नियुक्तियां किए जाने जैसी चिंताओं का उल्लेख किया गया। अदालत ने कहा कि सरकारी संसाधनों का लाभ तभी सार्थक है, जब विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी मिले।
एसटीएफ को सत्यापन की प्रक्रिया तेजी से पूरी करने और अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट अदालत में पेश करने का निर्देश दिया गया है। मामले में अनुपालन की समीक्षा के लिए 4 नवंबर की तारीख निर्धारित की गई है।
इस आदेश से राज्य के सरकारी विद्यालयों में शिक्षक नियुक्तियों की पारदर्शिता और दस्तावेजों की प्रमाणिकता की जांच को गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि, जांच के दायरे में आने वाले प्रत्येक शिक्षक को दोषी नहीं माना जा सकता; किसी भी अनियमितता की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही होगी।






