
जम्मू-कश्मीर: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र शासित प्रदेश के विभाजन की मांग को सिरे से खारिज करते हुए इसे जनता, खासकर जम्मू क्षेत्र के हितों के खिलाफ बताया है। मंगलवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के दो दिवसीय ब्लॉक अध्यक्ष सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने जम्मू-कश्मीर की एकता को “अपरिवर्तनीय” करार दिया और साफ कहा कि क्षेत्रीय या धार्मिक आधार पर राज्य को बांटने की राजनीति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो ताकतें एक बार फिर जम्मू-कश्मीर के विभाजन की बात कर रही हैं, वे जनता को गुमराह करने का काम कर रही हैं। ऐसी राजनीति न केवल प्रदेश की साझा विरासत को कमजोर करती है, बल्कि जम्मू के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है। उमर अब्दुल्ला ने दो टूक कहा कि जब तक केंद्र शासित प्रदेश में नेशनल कॉन्फ्रेंस का झंडा लहराता रहेगा, तब तक कोई भी शक्ति जम्मू-कश्मीर को बांटने का साहस नहीं कर सकेगी।
इस सम्मेलन की शुरुआत सोमवार को हुई थी, जिसकी अध्यक्षता नेकां अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने की। सम्मेलन में संगठनात्मक मजबूती, जनसरोकारों और आगामी राजनीतिक रणनीतियों पर चर्चा की गई। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने ‘दरबार मूव’ प्रथा का भी जिक्र किया, जिसे पिछली सरकार के कार्यकाल में बंद कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि 16 अक्टूबर को नेकां सरकार ने इस परंपरा को बहाल कर अपना चुनावी वादा पूरा किया है। लगभग 150 वर्ष पुरानी यह परंपरा डोगरा शासकों द्वारा शुरू की गई थी, जिसके तहत सरकार छह-छह महीने जम्मू और श्रीनगर में कार्य करती है।
उमर अब्दुल्ला ने भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘दरबार मूव’ को रोकने या मेडिकल कॉलेज बंद होने पर जश्न मनाने वाले लोग जम्मू के हितैषी नहीं हो सकते। उन्होंने चेतावनी दी कि संकीर्ण और विभाजनकारी राजनीति ने पहले भी जम्मू-कश्मीर को नुकसान पहुंचाया है और आगे भी ऐसा ही करेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार राज्य की एकता, भाईचारे और साझा पहचान की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी विभाजनकारी एजेंडे को पनपने नहीं दिया जाएगा।






