
कोलकाता: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभालने के बाद नितिन नवीन पहली बार पश्चिम बंगाल के दौरे पर पहुंचे, जहां उनका जोर राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ संगठनात्मक मजबूती पर भी साफ दिखाई दिया। अपने दो दिवसीय दौरे की शुरुआत करते हुए उन्होंने मंगलवार को ‘कमल मेला’ नामक जनसभा को संबोधित किया और बंगाल की ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और कलात्मक परंपरा की खुलकर सराहना की।
सभा को संबोधित करते हुए नितिन नवीन ने बंगाल की धरती को नमन किया और कहा कि यह भूमि केवल राजनीति की नहीं, बल्कि विचार, सुधार और सृजन की भी जन्मस्थली रही है। उन्होंने समाज सुधारक राजा राम मोहन रॉय को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय समाज को नई दिशा दी और आधुनिक भारत की नींव मजबूत की। इसके साथ ही उन्होंने आध्यात्मिक संत रामकृष्ण परमहंस के योगदान को अमूल्य बताते हुए कहा कि उनकी शिक्षाएं आज भी मानवता को मार्ग दिखाती हैं।
नितिन नवीन ने अपने भाषण में बंगाल की कला और साहित्य को भी विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने महान अभिनेता उत्तम कुमार, क्रांतिकारी कवि काजी नजरूल इस्लाम और विश्वविख्यात फिल्म निर्देशक सत्यजीत रे का उल्लेख करते हुए कहा कि इन विभूतियों ने बंगाल की कला को वैश्विक पहचान दिलाई और भारत की सांस्कृतिक छवि को दुनिया भर में स्थापित किया।
सांस्कृतिक संदेश के साथ-साथ यह दौरा राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। नितिन नवीन ने दुर्गापुर में पश्चिम बंगाल भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक की, जिसमें आने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीति पर चर्चा हुई। बैठक में राज्य की राजनीतिक स्थिति, संगठन विस्तार और बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करने पर मंथन किया गया।
इस बैठक में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष, डॉ. सुकांत मजूमदार और राहुल सिन्हा सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नितिन नवीन ने कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया और कहा कि पार्टी का लक्ष्य पश्चिम बंगाल के हर कोने तक पहुंच बनाना और जनता के विश्वास को और मजबूत करना है।






