जम्मू-कश्मीर: जम्मू-कश्मीर में पुलवामा आतंकी हमले की सातवीं बरसी के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह हाई अलर्ट पर है। खुफिया एजेंसियों ने आशंका जताई है कि आतंकी संगठन इस संवेदनशील तारीख का फायदा उठाकर सुरक्षा बलों या भीड़भाड़ वाले इलाकों को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं। इसी इनपुट को ध्यान में रखते हुए पुलिस और सेना ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता और निगरानी बढ़ा दी है।
इस बीच, जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात ने सांबा जिले का दौरा कर सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात पुलिस बल की तैयारियों का आकलन किया और अधिकारियों को किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने वरिष्ठ पुलिस और नागरिक प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक कर समग्र सुरक्षा परिदृश्य, घुसपैठ की संभावनाओं और आतंकवाद-रोधी उपायों पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक में सांबा की उपायुक्त आयुषी सूदन, कठुआ के उपायुक्त राजेश शर्मा, सांबा के एसएसपी वीरेंद्र मनहास और कठुआ की एसएसपी मोहिता शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने डीजीपी को सीमावर्ती जिलों में लागू सुरक्षा उपायों, गश्त और निगरानी व्यवस्था के बारे में जानकारी दी। डीजीपी ने पुलिस और नागरिक प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने और सुरक्षा ग्रिड को और मजबूत करने पर जोर दिया।
वहीं, उत्तरी सेना कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने भी सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने संयुक्त नियंत्रण केंद्र की बैठक में सेना, पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के अधिकारियों के साथ आतंकवाद-रोधी रणनीति और खुफिया समन्वय पर चर्चा की।
प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं, ताकि शांति और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।







