तमिलनाडु: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने बुधवार को कांग्रेस और अन्य सहयोगी पार्टियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए। इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में बोलते हुए स्टालिन ने कहा कि डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन में कांग्रेस किसी भी तरह के मंत्री पद या साझा शासन का हिस्सा नहीं बनेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि तमिलनाडु में सत्ता-साझाकरण मॉडल लागू नहीं होगा और यह किसी भी पार्टी के लिए सौहार्दपूर्ण गठबंधन को प्रभावित नहीं करेगा।
स्टालिन ने कहा कि कांग्रेस निश्चित रूप से डीएमके गठबंधन का हिस्सा बनी रहेगी और यह राज्य के चुनावों के बाद भी जारी रहेगा। उन्होंने मीडिया पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग जानबूझकर गलत धारणाएं फैला रहे हैं, जबकि गठबंधन पूर्ण रूप से सौहार्दपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ अपने व्यक्तिगत और राजनीतिक संबंधों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी मेरे भाई की तरह हैं और दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन मजबूत बने रहने में उनकी अहम भूमिका रही है।
इससे पहले, तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सेल्वा पेरुंथगई ने संकेत दिया था कि डीएमके-कांग्रेस गठबंधन अंतिम रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि औपचारिक सीट बंटवारे की बातचीत 22 फरवरी से शुरू होगी। पेरुंथगई ने यह भी स्पष्ट किया कि डीएमके नेतृत्व वाला गठबंधन बेहद मजबूत है और जनता ने पहले ही इसे स्वीकार कर लिया है। उनका कहना था कि चुनावों में लगातार जीत हासिल करने की दिशा में गठबंधन पूरी तरह तैयार है।
राज्य में आगामी चुनावों के मद्देनजर यह स्पष्ट संदेश देने के साथ ही स्टालिन ने कांग्रेस को समझा दिया कि गठबंधन का मतलब सत्ता साझा करना नहीं है। यह बयान गठबंधन में स्पष्ट सीमाओं और दलों के रोल को रेखांकित करता है। ऐसे में तमिलनाडु में चुनावी रणनीति और सीटों का बंटवारा दोनों ही पार्टियों के लिए रणनीतिक मोड़ साबित होगा।







