प्रयागराज: उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने प्रयागराज में माघ मेले से जुड़े विवाद पर सियासी एंट्री करते हुए धर्म और राजनीति को अलग रखने की सख्त जरूरत बताई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि धर्म में राजनीति का हस्तक्षेप इसी तरह बढ़ता रहा, तो इससे समाज में विवाद, तनाव और अशांति और गहराएगी। उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मायावती ने यह टिप्पणी की, जो शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को संगम में स्नान से कथित रूप से रोके जाने के आरोपों के बीच आई है।
मायावती ने कहा कि हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में धार्मिक आयोजनों, पर्व-त्योहारों, पूजा-पाठ और स्नान समारोहों में राजनीतिक हस्तियों की सक्रियता लगातार बढ़ी है। उन्होंने इसे चिंताजनक प्रवृत्ति बताते हुए कहा कि इससे जनता के बीच नए टकराव और असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है। प्रयागराज स्नान विवाद को उदाहरण के तौर पर रखते हुए उन्होंने कहा कि संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए धर्म को राजनीति से जोड़ना खतरनाक साबित हो सकता है।
बसपा सुप्रीमो ने संविधान और कानून का हवाला देते हुए कहा कि भारत का संवैधानिक ढांचा स्पष्ट रूप से धर्म और राजनीति को अलग रखने की बात करता है। उन्होंने जोर दिया कि शासन का उद्देश्य जनकल्याण और जन-केंद्रित नीतियां होनी चाहिए, न कि धार्मिक आयोजनों को राजनीतिक मंच में बदलना। इस अवसर पर मायावती ने उत्तर प्रदेश दिवस की शुभकामनाएं भी दीं और राज्य में शांति, सौहार्द और भाईचारे को बनाए रखने की अपील की।
इस विवाद को लेकर सियासत पहले से ही गरमाई हुई है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर सनातन धर्म की परंपराओं के अपमान का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि संत और ऋषि समाज की धरोहर हैं और उनसे आशीर्वाद लेना धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। वहीं, प्रयागराज प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शंकराचार्य बिना पूर्व अनुमति के भारी भीड़ के साथ संगम पहुंचे थे, जिससे सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई। प्रशासन का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए थे।







