पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल की सियासत में इन दिनों सम्मान और अपमान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। मामला देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रोटोकॉल से जुड़ा है, जिस पर केंद्र और राज्य सरकार आमने-सामने आ गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तृणमूल कांग्रेस सरकार पर राष्ट्रपति के अपमान का आरोप लगाया, तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुरानी तस्वीर दिखाकर इस आरोप का पलटवार किया।
दरअसल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय आदिवासी सम्मेलन में भाग लेने के लिए बागडोगरा पहुंची थीं। बताया गया कि एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री या राज्य सरकार का कोई मंत्री उन्हें रिसीव करने नहीं पहुंचा, जिस पर राष्ट्रपति ने नाराजगी जताई। उन्होंने कार्यक्रम स्थल में बदलाव को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया। राष्ट्रपति ने कहा कि प्रोटोकॉल के तहत आम तौर पर मुख्यमंत्री या मंत्री को मौजूद रहना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि वह बंगाल की ही बेटी हैं और यहां आकर उन्हें खुशी भी हुई, हालांकि व्यवस्था को लेकर उन्हें दुख हुआ।
इस पूरे विवाद के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में धरना स्थल से प्रतिक्रिया देते हुए एक पुरानी तस्वीर दिखाई। यह तस्वीर 31 मार्च 2024 की बताई जा रही है, जब राष्ट्रपति मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी को भारत रत्न देने के बाद उनसे मिलने पहुंचे थे। तस्वीर में प्रधानमंत्री और आडवाणी बैठे नजर आते हैं जबकि राष्ट्रपति खड़ी दिखाई देती हैं। ममता बनर्जी ने इसे उदाहरण बताते हुए सवाल उठाया कि आखिर सम्मान का सवाल कौन उठा रहा है।
ममता ने यह भी स्पष्ट किया कि वह राष्ट्रपति के पद का पूरा सम्मान करती हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल को बार-बार निशाना बनाना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि सिलीगुड़ी का कार्यक्रम एक निजी संस्था द्वारा आयोजित था और राज्य सरकार को इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं थी। साथ ही उन्होंने कहा कि वह उस समय जनता के मताधिकार से जुड़े मुद्दे पर धरने पर बैठी थीं, इसलिए वहां से जाना संभव नहीं था। इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।







