बरसाना (मथुरा)। फाल्गुन मास की उमंग और ब्रज की रसमयी परंपराओं के बीच विश्वप्रसिद्ध लठामार होली का आयोजन आज राधारानी की नगरी बरसाना में हर्षोल्लास के साथ होगा। अबीर-गुलाल से रंगी गलियों और ‘राधे-राधे’ के जयघोष के बीच लाखों श्रद्धालु इस अनूठे उत्सव के साक्षी बनने के लिए पहुंच चुके हैं। श्रीजी मंदिर बरसाना (लाड़िली जी मंदिर) परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। मंदिर प्रांगण और रंगीली चौक में भक्ति और उल्लास का अद्भुत वातावरण देखने को मिल रहा है। परंपरा के अनुसार नंदगांव से आए हुरियारे बरसाना पहुंचेंगे, जहां हुरियारिनें घूंघट की ओट में लाठियों के साथ प्रेमपूर्ण परिहास करते हुए उनका स्वागत करेंगी। अबीर-गुलाल की उड़ती धूल के बीच यह आयोजन जीवंत लोकनाट्य का रूप ले लेता है।
लठामार होली को ब्रज की लोकसंस्कृति और नारी शक्ति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि लगभग साढ़े पांच सौ वर्ष पूर्व ब्रजाचार्य नारायण भट्ट ने इस परंपरा को व्यवस्थित स्वरूप प्रदान किया। उनके ग्रंथों में इस उत्सव का उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि महिलाओं को आत्मरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से इस परंपरा को होली उत्सव से जोड़ा गया। आज प्रातः रंगीली होली तथा सायंकाल लठामार होली का मुख्य आयोजन होगा, जबकि अगले दिन यही परंपरा नंदगांव में निभाई जाएगी। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा, चिकित्सा और यातायात के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। बरसाना की लठामार होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सामाजिक चेतना का जीवंत प्रतीक है, जो ब्रज की सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर विशेष पहचान दिलाता है।







