
नयी दिल्ली: संसद के बजट सत्र के पहले दिन बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संयुक्त सत्र को संबोधित किया, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में सामाजिक न्याय, समावेशी विकास और एक विकसित भारत के लिए केंद्र सरकार के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। इस दौरान वंदे मातरम की 150वीं जयंती, बंकिम चंद्र चटर्जी, गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस, बाबासाहेब अंबेडकर की 150वीं जयंती और भारत रत्न भूपेन हजारिका के शताब्दी समारोह जैसे महत्वपूर्ण विषयों का जिक्र किया गया।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस हंगामे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह का व्यवहार देश के लिए शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि संसद में इस तरह के कृत्य से देश प्रमुख हस्तियों और उनके योगदान का अपमान महसूस करता है। रिजिजू ने कहा, “मैं अपना अपमान तो बर्दाश्त कर सकता हूँ, लेकिन गुरु तेग बहादुर, भूपेन हजारिका, सरदार पटेल, बिरसा मुंडा और वंदे मातरम की जयंती का अपमान देश कभी माफ नहीं करेगा। राजनीति किसी भी मामले में की जा सकती है, लेकिन इन मामलों में राजनीति करना स्वीकार्य नहीं है।”
रिजिजू ने आगे कहा कि विपक्ष ने न केवल राष्ट्रपति का अपमान किया, बल्कि उन सभी राष्ट्रीय प्रतीकों और प्रमुख हस्तियों का भी अपमान किया, जिनका देश में विशेष महत्व है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति अलग हो सकती है, लेकिन सम्मान और राष्ट्रभक्ति के मामलों में समझौता स्वीकार्य नहीं है।
विपक्ष के हंगामे के कारण संयुक्त सत्र दोपहर में स्थगित कर दिया गया और गुरुवार को सुबह 11 बजे पुनः बैठक होगी। रिजिजू ने कहा कि देश इस व्यवहार को माफ नहीं करेगा और ऐसे कृत्यों से राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विरासत पर चोट पहुँचती है। इस घटना ने संसद में अनुशासन और सम्मान की आवश्यकता को फिर से उजागर किया।
इस तरह, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुए हंगामे ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस को जन्म दिया, जबकि केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि देश और उसके प्रमुख प्रतीकों का अपमान सहन नहीं किया जाएगा।






