अजमेर, राजस्थान: राजस्थान के अजमेर स्थित विश्व प्रसिद्ध ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह शरीफ में महाना छठी धार्मिक श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक रस्मों के साथ मनाई गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जायरीन और अकीदतमंद दरगाह पहुंचे तथा गरीब नवाज के दरबार में हाजिरी लगाकर देश में अमन-चैन, खुशहाली और तरक्की की दुआ मांगी।
दरगाह शरीफ के आहाता-ए-नूर में सुबह तड़के से ही जायरीन के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, दरगाह परिसर और आसपास के इलाकों में श्रद्धालुओं की चहल-पहल बढ़ती गई। निर्धारित समय पर सुबह नौ बजे फातिहा की रस्म अदा की गई। इस दौरान ख्वाजा साहब से जुड़े खुद्दामों ने धार्मिक परंपराओं के अनुसार विभिन्न रस्में पूरी कराईं।
शिजरा ख्वानी और सलातो-सलाम पेश
महाना छठी के अवसर पर शिजरा ख्वानी और सलातो-सलाम पेश किया गया। पूरी रस्म के दौरान दरगाह परिसर में श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे जायरीन ने दरगाह में जियारत की और अपनी मन्नतों तथा परिवार की सलामती के लिए दुआएं मांगीं।
दरगाह की अंजुमन कमेटी के प्रतिनिधियों ने भी इस मौके पर देश में शांति, आपसी भाईचारे, खुशहाली और समृद्धि की कामना की। धार्मिक आयोजन के कारण दरगाह परिसर और आसपास के बाजारों में मेले जैसा माहौल देखने को मिला। जायरीन की आवाजाही से क्षेत्र में रौनक बनी रही। रस्मों में शामिल होने के बाद श्रद्धालुओं के अपने-अपने घरों की ओर लौटने का सिलसिला शुरू हो गया।
दिसंबर में होगा 815वां सालाना उर्स
ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में आगामी 815वें सालाना उर्स को लेकर भी तैयारियां और श्रद्धालुओं की उत्सुकता बनी हुई है। परंपरा के अनुसार, उर्स का झंडा पांच दिसंबर को चढ़ाया जाएगा। इसके बाद उर्स के दौरान 16 दिसंबर को छठी की रस्म के साथ कुल की धार्मिक रस्म अदा की जाएगी।
अजमेर शरीफ दरगाह देश-विदेश के लाखों लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां होने वाले धार्मिक आयोजन सूफी परंपरा, प्रेम, भाईचारे और मानवता के संदेश को आगे बढ़ाते हैं।







