तिरुवनंतपुरम: केरल में सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल पेश करते हुए पलियम के इमाम वी.पी. सुहैब मौलवी की एक अनोखी पहल सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गई है। उन्होंने प्रसिद्ध अट्टुकल पोंगाला उत्सव के दौरान हिंदू श्रद्धालुओं के लिए मस्जिदों और मुस्लिम घरों के दरवाजे खोलने की अपील की है। उनकी इस पहल को लोगों ने सांप्रदायिक एकता और आपसी सम्मान का शानदार उदाहरण बताया है।
अट्टुकल पोंगाला उत्सव केरल के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है, जिसमें लाखों महिला श्रद्धालु भाग लेती हैं। इस दौरान श्रद्धालु मंदिर के आसपास और शहर के विभिन्न इलाकों में इकट्ठा होकर पारंपरिक तरीके से ‘पोंगाला’ प्रसाद तैयार करती हैं। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से अक्सर जगह, पानी और विश्राम जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी हो जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए मौलवी वी.पी. सुहैब ने यह पहल की है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
मौलवी ने मुस्लिम समुदाय से अपील की है कि वे अपने घरों और मस्जिदों को श्रद्धालुओं के लिए खोलें, ताकि उन्हें आराम करने, पानी पीने और अन्य जरूरी सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने कहा कि इंसानियत और सेवा सबसे बड़ा धर्म है और ऐसे अवसरों पर एक-दूसरे की मदद करना समाज को मजबूत बनाता है।
सोशल मीडिया पर उनकी इस अपील को व्यापक समर्थन मिल रहा है। कई लोगों ने इसे “असली केरल की पहचान” बताया है और कहा है कि यह पहल देश में आपसी प्रेम और सद्भाव को बढ़ावा देने का संदेश देती है।
यह पहल न केवल धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि विभिन्न समुदाय मिलकर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। मौलवी की इस सोच ने एक बार फिर साबित किया है कि एकता और भाईचारा ही समाज की सबसे बड़ी ताकत है।







