नयी दिल्ली: भारत और कनाडा के द्विपक्षीय संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में आई तनावपूर्ण स्थितियों के बाद अब सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में खालिस्तानी अलगाववाद और हारदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर भारत पर लगाए गए आरोपों के कारण दोनों देशों के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हो गए थे। इस कारण व्यापार, निवेश और राजनीतिक सहयोग पर बर्फ जमी रही थी।
हालांकि, ट्रूडो के बाद प्रधानमंत्री पद संभालने वाले मार्क कार्नी ने भारत के साथ संबंधों में संतुलित और सकारात्मक रुख अपनाया है। उन्होंने पिछले साल जून और नवंबर में पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और लंबित व्यापार समझौते CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) पर बातचीत शुरू करने का रास्ता साफ किया। CEPA पर वार्ता करीब डेढ़ दशक से अटकी हुई थी, और समझौता होने पर दोनों देशों का लक्ष्य 2030 तक 70 अरब डॉलर का वार्षिक व्यापार हासिल करना है।
कार्नी के दौरे से न केवल लंबित मुद्दों का समाधान संभव है, बल्कि नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के मौके भी मिलेंगे। व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और शिक्षा के साथ-साथ कनाडा से भारत को यूरेनियम और अन्य ऊर्जा उत्पादों की आपूर्ति बढ़ाने पर भी चर्चा होगी। साथ ही, पाइपलाइन और टर्मिनल जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में निवेश के अवसर भी तलाशे जाएंगे।
आर्थिक आधार मजबूत है: 2024 में भारत और कनाडा के बीच वस्तु व्यापार 13.3 अरब डॉलर का रहा, जिसमें से कनाडा का निर्यात 5.3 अरब डॉलर था। सर्विस ट्रेड में भी तेजी आई है, जो आर्थिक सहयोग की मजबूत जमीन को दर्शाता है।
इसके अलावा, दोनों देशों को अमेरिका की टैरिफ नीतियों और वैश्विक बाजार में अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ा है। कार्नी और भारत ने इस दबाव को देखते हुए आपसी सहयोग को और मजबूत करने का रुख अपनाया है। इस दौरे से द्विपक्षीय संबंधों में नई शुरुआत की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे भारत और कनाडा दोनों को राजनीतिक और आर्थिक लाभ मिलेगा।







