नई दिल्ली: नौकरी के बदले जमीन घोटाले मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और अन्य के खिलाफ नौकरी के बदले जमीन मामले में आरोप पत्र पर फैसला सुरक्षित रखा गया है। सीबीआई ने इस मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी और अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है।
आरोप है कि जमीन के बदले रेलवे में नौकरियां दी गईं। अदालत ने 13 अक्तूबर तक अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इससे पहले बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव ने जमीन के बदले नौकरी मामले में निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इससे पहले लालू यादव की इस मांग को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा था कि कार्यवाही पर रोक लगाने का कोई ठोस कारण नहीं है। उच्च न्यायालय में अपनी याचिका में लालू प्रसाद यादव ने सीबीआई की एफआईआर और 2022, 2023 और 2024 में दायर तीन आरोप पत्रों और संज्ञान आदेशों को रद्द करने की मांग की थी।
उन्होंने कहा था कि रिपोर्ट 14 साल की देरी से 2022 में दर्ज की गई, जबकि सीबीआई ने प्रारंभिक पूछताछ और जांच सक्षम अदालत के समक्ष क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने के बाद बंद कर दी गई थी। अधिकारियों ने बताया कि यह मामला मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र में ग्रुप-डी की नियुक्तियों से संबंधित है। यह नियुक्ति 2004 से 2009 के बीच लालू के रेल मंत्री रहने के दौरान की गई थी। इन नियुक्तियों के बदले में लोगों ने राजद सुप्रीमो के परिवार या सहयोगियों के नाम पर जमीन के टुकड़े उपहार में दिए या हस्तांतरित किए। 18 मई 2022 को लालू और उनकी पत्नी, दो बेटियों, अज्ञात सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों सहित अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।







