
नयी दिल्ली: राज्यसभा में सोमवार को पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बयान के दौरान हंगामे का माहौल बन गया। विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी पर केंद्रीय मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कड़ी आपत्ति जताई और विपक्ष के व्यवहार को गैरजिम्मेदाराना करार दिया। नड्डा ने आरोप लगाया कि विपक्ष को गंभीर मुद्दों पर चर्चा करने में नहीं बल्कि केवल सदन में अराजकता फैलाने में दिलचस्पी है।
सदन में बोलते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि यह बेहद दुखद है कि जब देश से जुड़े महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हो रही है, तब विपक्ष शोर-शराबा कर रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को न तो देश के हितों की चिंता है और न ही सार्थक बहस में कोई रुचि है। नड्डा के मुताबिक, विपक्ष केवल अपने राजनीतिक फायदे के लिए मुद्दों को उछालता है और सदन की कार्यवाही को बाधित करता है, लेकिन इस तरह की राजनीति में उन्हें कभी सफलता नहीं मिलेगी।
दरअसल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और उसके वैश्विक प्रभावों पर सरकार का पक्ष रख रहे थे। अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री लगातार क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए हैं और संबंधित मंत्रालय आपस में समन्वय कर स्थिति का आकलन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार ने पहले ही क्षेत्रीय अस्थिरता को लेकर चिंता जताई थी और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी।
यह तनाव 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद बढ़ा, जिसमें ईरान को निशाना बनाया गया था। इन हमलों में ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और सत्तारूढ़ दल के कई प्रमुख नेताओं की मौत हो गई थी। इसके बाद से क्षेत्र में लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाइयों का सिलसिला जारी है, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं।
जयशंकर ने दोहराया कि भारत का मानना है कि इस संकट का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है। उन्होंने सभी पक्षों से तनाव कम करने और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में कदम उठाने की अपील की।






