
जम्मू-कश्मीर: जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति को लेकर सेना प्रमुख ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें आतंकवाद रोधी अभियानों की प्रगति और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। इस बैठक का मकसद घाटी में सुरक्षा बलों की तैयारियों को और मजबूत करना तथा बदलते आतंकी तौर-तरीकों के अनुरूप ऑपरेशनों को और प्रभावी बनाना था।
समीक्षा के दौरान सेना प्रमुख को जमीनी हालात, हालिया अभियानों की सफलता और खुफिया इनपुट्स के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ चल रहे अभियानों में जवानों की भूमिका और समर्पण की सराहना की। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देने की किसी भी कोशिश को सख्ती से नाकाम किया जाएगा।
बैठक में उन्नत तकनीकों के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया गया। ड्रोन, रियल-टाइम सर्विलांस सिस्टम, आधुनिक संचार उपकरण और डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों के जरिए आतंकियों की गतिविधियों पर नजर रखने और त्वरित कार्रवाई करने की रणनीति पर चर्चा हुई। सेना प्रमुख ने कहा कि तकनीक के प्रभावी उपयोग से न केवल ऑपरेशनल क्षमता बढ़ेगी, बल्कि जवानों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
इसके अलावा स्थानीय पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र बलों और खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल को लेकर भी बातचीत हुई। सेना प्रमुख ने संयुक्त अभियानों को और मजबूत करने तथा सूचना साझा करने की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी खतरे से समय रहते निपटा जा सके।
सेना प्रमुख ने नागरिकों की सुरक्षा और विश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें स्थानीय लोगों का सहयोग भी बेहद अहम है। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारतीय सेना जम्मू-कश्मीर में शांति, स्थिरता और विकास सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस समीक्षा को सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में आतंकवाद रोधी अभियानों को और अधिक सटीक, तकनीक-सक्षम और प्रभावी बनाया जा सकेगा।






