नयी दिल्ली: संसद के बजट सत्र 2026 का दूसरा चरण सोमवार को तनावपूर्ण माहौल में शुरू हुआ। इस दौरान विदेश मंत्री S. Jaishankar ने राज्यसभा में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और ईरान से जुड़े संघर्ष पर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से संवाद और कूटनीति के रास्ते को ही सबसे प्रभावी समाधान मानता है और मौजूदा संकट में भी सभी पक्षों को संयम बरतने की जरूरत है।
पश्चिम एशिया में हालिया घटनाक्रम के बाद क्षेत्रीय तनाव तेजी से बढ़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की हत्या के बाद हालात और अधिक बिगड़ गए। इसके जवाब में Iran ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों और इजरायली लक्ष्यों पर जवाबी हमले किए, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है।
राज्यसभा में अपने बयान के दौरान जयशंकर ने कहा कि भारत स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और सरकार की प्राथमिकता क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी संघर्ष का स्थायी समाधान केवल बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए ही संभव है।
सत्र के दौरान विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार से विस्तृत चर्चा की मांग भी की। विपक्ष के नेता Mallikarjun Kharge ने ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े संभावित प्रभावों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट का असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है, इसलिए इस पर संसद में गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
इस बीच संसद के एजेंडे में कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे भी शामिल हैं। लोकसभा में स्पीकर Om Birla के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर भी सियासी हलचल तेज है, जिसे विपक्षी दलों का समर्थन मिला है। कुल मिलाकर बजट सत्र का यह चरण घरेलू राजनीति और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम दोनों के कारण काफी अहम माना जा रहा है।







