नयी दिल्ली: कांग्रेस सांसद और पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने समझौते के ऐलान के 36 घंटे बाद भी किसी आधिकारिक संयुक्त बयान के जारी न होने पर सवाल उठाते हुए इसे सरकार की “अस्पष्ट और अपारदर्शी” नीति करार दिया। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान को डेढ़ दिन से ज्यादा समय बीत चुका है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि यह व्यापार समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुरोध पर घोषित किया गया और तुरंत प्रभाव से लागू भी हो रहा है, लेकिन अब तक भारत सरकार की ओर से इसकी कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार प्रचार तो कर रही है, लेकिन समझौते की शर्तें सार्वजनिक नहीं कर रही। उनका कहना है कि इतना तो साफ हो गया है कि भारत ने कृषि उत्पादों के आयात को लेकर रियायतें दी हैं, जो किसानों और घरेलू उद्योगों के लिए चिंता का विषय हो सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार इसे “ऐतिहासिक और भविष्य-निर्धारक” बता रही है, तो फिर संयुक्त बयान और ठोस विवरण सामने क्यों नहीं लाए जा रहे।
इस समझौते के तहत भारतीय वस्तुओं पर शुल्क 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने की बात सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने आशंका जताई है कि इससे कृषि और दुग्ध उत्पादन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर दबाव बढ़ सकता है। पार्टी ने अमेरिकी राष्ट्रपति के उस दावे पर भी चिंता जताई है, जिसमें कहा गया है कि भारत कुछ अमेरिकी वस्तुओं पर शुल्क शून्य कर सकता है और अमेरिका से 500 अरब डॉलर मूल्य की ऊर्जा, तकनीक, कृषि उत्पाद और अन्य सामान खरीदेगा।
हालांकि, केंद्र सरकार ने इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत और अमेरिका इस सप्ताह व्यापार समझौते पर एक संयुक्त बयान जारी कर सकते हैं और वार्ता टीम अंतिम चरण में विवरण को अंतिम रूप दे रही है। वहीं, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा कृषि और दुग्ध क्षेत्रों के हितों की रक्षा की है। उन्होंने दावा किया कि इस समझौते से एमएसएमई, इंजीनियरिंग, वस्त्र, रत्न-आभूषण, चमड़ा और समुद्री उत्पाद जैसे क्षेत्रों को नए अवसर मिलेंगे।







