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आईटी शेयरों में भारी बिकवाली, ₹1.9 लाख करोड़ डूबे; US डील के बाद भी बाजार क्यों टूटा?

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IT stocks saw heavy selling, ₹1.9 lakh crore lost; why did the market crash even after the US deal?

नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को आईटी सेक्टर में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों को करीब ₹1.9 लाख करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा। यह गिरावट हाल के वर्षों में आईटी शेयरों के लिए सबसे खराब सत्रों में से एक मानी जा रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव ने पारंपरिक सॉफ्टवेयर और आईटी सर्विसेज कंपनियों के भविष्य को लेकर निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिसका सीधा असर शेयर कीमतों पर पड़ा।

इस कमजोरी का असर केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी टेक शेयर दबाव में दिखे। अमेरिका में नैसडैक इंडेक्स करीब 1.4 प्रतिशत टूट गया, जिससे सॉफ्टवेयर कंपनियों का संयुक्त मार्केट कैप लगभग 300 अरब डॉलर घट गया। वैश्विक संकेतों का असर भारतीय आईटी शेयरों पर भी साफ नजर आया।

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घरेलू बाजार में इन्फोसिस और एमफेसिस के शेयरों में लगभग 7 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई। एलटीआईमाइंडट्री, कोफोर्ज, टीसीएस, एचसीएल टेक और एमफेसिस में 5 से 6 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई, जबकि विप्रो और टेक महिंद्रा के शेयर करीब 4 प्रतिशत फिसले। इस भारी बिकवाली के चलते निफ्टी आईटी इंडेक्स का संयुक्त बाजार पूंजीकरण घटकर 30 लाख करोड़ रुपये से नीचे आ गया।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक हाल ही में एआई डेवलपर कंपनी एंथ्रोपिक द्वारा ऑटोमैटिक लीगल वर्क समेत कई कार्यों के लिए नया टूल लॉन्च किए जाने से आईटी कंपनियों की पारंपरिक सेवाओं पर दबाव की आशंका बढ़ी है। निवेशकों को डर है कि एआई आधारित समाधान आईटी सेवाओं की मांग को प्रभावित कर सकते हैं।

इस बिकवाली का असर व्यापक बाजार पर भी पड़ा। बीएसई सेंसेक्स सुबह 11:25 बजे 165 अंक की गिरावट के साथ 83,573 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। खास बात यह है कि इससे एक दिन पहले ही अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की खबरों के चलते बाजार में जोरदार तेजी देखी गई थी। हालांकि, आईटी शेयरों में आई अचानक गिरावट ने निवेशकों की चिंता फिर बढ़ा दी है।

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