नयी दिल्ली: देश की सबसे बड़ी रिफाइनरी, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), ने रूस से तेल आयात में कटौती की भरपाई के लिए ब्राजील, अंगोला और अन्य देशों से कुल 70 लाख बैरल तेल खरीदा है। यह कदम भारत की ऊर्जा रणनीति में बड़ा बदलाव दर्शाता है, जिसमें केवल सस्ती आपूर्ति नहीं बल्कि भू-राजनीतिक संतुलन और दीर्घकालिक रणनीति को भी ध्यान में रखा गया है।
सूत्रों के अनुसार, आईओसी ने शेल से अबू धाबी के मुरबान ग्रेड का 10 लाख बैरल, व्यापारी मर्कुरिया से अपर जाकुम ग्रेड का 20 लाख बैरल और एक्सॉन से अंगोला के हंगो व क्लोव ग्रेड का 10 लाख बैरल खरीदा। इसके अलावा ब्राजील की पेट्रोब्रास से बुजियोस तेल के 20 लाख बैरल वैकल्पिक अनुबंध के तहत खरीदे गए, जो पारस्परिक सहमति के आधार पर सौदेबाजी की सुविधा देता है।
इस रणनीतिक बदलाव का मुख्य कारण रूस पर निर्भरता घटाना है। दिसंबर में भारत का रूसी तेल आयात दो वर्षों में सबसे निचले स्तर पर आ गया, जबकि ओपेक देशों से आयात का हिस्सा 11 महीनों के उच्चतम स्तर तक पहुंचा। 2022 में यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूसी समुद्री कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बना था, लेकिन अब घरेलू रिफाइनरियां विविध स्रोतों से तेल खरीदने की दिशा में बढ़ रही हैं। इसके तहत कोलंबिया की ईकोपेट्रोल और इक्वाडोर के ओरिएंट क्रूड से पहली बार तेल खरीदा गया।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि रूस से दूरी और ब्राजील, अंगोला जैसे वैकल्पिक स्रोतों से खरीद बढ़ाने का यह कदम भारत को अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते में मदद कर सकता है। विशेष रूप से टैरिफ में राहत और ऊर्जा व्यापार को लेकर भारत की स्थिति मजबूत होगी। गोपनीयता समझौतों के कारण सौदों की कुल कीमत सार्वजनिक नहीं की गई, लेकिन यह स्पष्ट है कि भारतीय रिफाइनरियां अब दीर्घकालिक रणनीति और वैश्विक बाजार संतुलन के आधार पर फैसले ले रही हैं।
इस कदम से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार में पकड़ दोनों मजबूत होने की उम्मीद है।







