नयी दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई ट्रेड डील को अभी एक सप्ताह ही हुआ है, लेकिन इस दौरान समझौते में कई अहम बदलाव सामने आ चुके हैं। सबसे ताजा बदलाव दाल को लेकर है। अमेरिका ने फूड एंड एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स की सूची से दाल को हटा दिया है और दोनों देशों की संशोधित फैक्ट शीट में भी नए प्रावधान जोड़े गए हैं। इससे संकेत मिलता है कि कृषि उत्पादों पर बातचीत अभी भी संवेदनशील मोड़ पर है।
पिछले दस दिनों में टैरिफ को लेकर बड़ा बदलाव हुआ है। अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगाए गए अतिरिक्त ‘पेनल्टी टैरिफ’ को समाप्त करते हुए प्रभावी शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। इससे भारतीय निर्यातकों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में राहत मिलने की उम्मीद है।
ऊर्जा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। रिपोर्टों के अनुसार भारत ने रूसी तेल आयात में कटौती का संकेत दिया है और अब अमेरिका व वेनेजुएला से ऊर्जा खरीद बढ़ाने की तैयारी है। साथ ही भारत ने अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर तक के उत्पाद—जिसमें LNG, कोकिंग कोल, हाईटेक उपकरण और बोइंग विमान शामिल हैं—खरीदने की मंशा जताई है।
डिजिटल टैक्स यानी इक्वलाइजेशन लेवी पर भारत ने नरम रुख दिखाया है, जिससे अमेरिकी टेक कंपनियों के लिए निवेश का रास्ता आसान हो सकता है। हालांकि कृषि क्षेत्र में भारत ने डेयरी, अनाज और जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलों को ‘नेगेटिव लिस्ट’ में रखकर घरेलू किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की है।
रणनीतिक स्तर पर यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। अमेरिका ने भारत को नागरिक परमाणु ऊर्जा और रक्षा विनिर्माण में विशेष प्राथमिकता देने का संकेत दिया है, जो दोनों देशों की साझेदारी को नई दिशा दे सकता है।







