नयी दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा है कि व्यापारिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद विश्व अर्थव्यवस्था ने उम्मीद से अधिक लचीलापन दिखाया है। रॉयटर्स को दिए साक्षात्कार में उन्होंने संकेत दिया कि आईएमएफ अपने आगामी ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक’ में वैश्विक विकास दर के अनुमान को मामूली रूप से बढ़ा सकता है। यह रिपोर्ट 19 जनवरी को जारी की जाएगी।
आईएमएफ ने अक्तूबर 2024 में 2025 के लिए वैश्विक जीडीपी वृद्धि अनुमान 3.0 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.2 प्रतिशत किया था, जबकि 2026 के लिए 3.1 प्रतिशत का अनुमान बरकरार रखा था। जॉर्जीवा के अनुसार अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव पहले की आशंका से कम रहा, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पटरी पर बनी रही। उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रदर्शन मजबूत है, लेकिन जोखिम अब भी नीचे की ओर झुके हुए हैं।
आईएमएफ प्रमुख ने भू-राजनीतिक तनाव, बढ़ते व्यापार विवाद और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) में तेज निवेश को भविष्य के बड़े जोखिम बताया। उनका कहना था कि यदि एआई से अपेक्षित उत्पादकता लाभ नहीं मिला तो कई देशों को वित्तीय दबाव झेलना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी चेताया कि अनेक देशों ने संभावित नए झटकों से निपटने के लिए पर्याप्त वित्तीय भंडार तैयार नहीं किए हैं। वर्तमान में आईएमएफ के 50 ऋण कार्यक्रम चल रहे हैं, जो अब तक का उच्च स्तर है और आने वाले समय में और देशों द्वारा मदद मांगे जाने की आशंका है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए जॉर्जीवा ने कहा कि व्यापक टैरिफ के बावजूद अमेरिका का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा है। वास्तविक टैरिफ दरें शुरुआती आशंकाओं से कम रहीं और अधिकांश देशों ने बड़े पैमाने पर जवाबी कदम नहीं उठाए, जिससे असर सीमित रहा। हालांकि उन्होंने आगाह किया कि यदि व्यापारिक माहौल और बिगड़ता है तो महंगाई तथा वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर फिर दबाव बढ़ सकता है। उनके अनुसार 2019 के बाद से विश्व अर्थव्यवस्था लगातार झटकों का सामना कर रही है, फिर भी इसकी मजबूती उम्मीद जगाती है।







