नयी दिल्ली: लोकसभा में बुधवार को उस समय राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ गया जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के लिए विपक्ष की ओर से दिए गए नोटिस में तकनीकी कमियां सामने आने की जानकारी मिली। लोकसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, नोटिस में प्रक्रिया संबंधी कुछ त्रुटियां पाई गई हैं, जिनके सुधार के लिए अध्यक्ष ने सचिवालय को आवश्यक निर्देश दिए हैं। बताया जा रहा है कि इन कमियों को दुरुस्त किए बिना प्रस्ताव पर आगे की कार्रवाई संभव नहीं है।
इस मुद्दे को लेकर सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्षी दलों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए सरकार पर निशाना साधा। साथ ही, विपक्ष ने अपने आठ सांसदों के निलंबन को वापस लेने की मांग भी उठाई। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए वेल तक पहुंच गए और सरकार पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया। स्थिति तनावपूर्ण होती देख विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
विपक्ष का कहना है कि नोटिस में तकनीकी खामियों का मुद्दा उठाकर चर्चा से बचने की कोशिश की जा रही है, जबकि सत्ता पक्ष का तर्क है कि संसदीय प्रक्रिया और नियमों का पालन अनिवार्य है।
इसी बीच, बीजू जनता दल के सांसद सस्मित पात्रा ने ‘विशेष उल्लेख’ के माध्यम से एक अलग लेकिन महत्वपूर्ण विषय उठाया। उन्होंने कहा कि 14वीं प्रेस परिषद का कार्यकाल अक्टूबर 2024 में समाप्त हो चुका है और अब तक नई परिषद का गठन नहीं होना चिंता का विषय है। पात्रा ने सरकार से आग्रह किया कि जल्द से जल्द 15वीं प्रेस परिषद का गठन कर मीडिया की जवाबदेही और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
संसद का यह घटनाक्रम दर्शाता है कि बजट सत्र के दौरान राजनीतिक टकराव और संस्थागत प्रक्रियाओं पर बहस तेज बनी हुई है।







