मुंबई: बीते कुछ दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया है। सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली कीमती धातुओं में इस तरह की टूट से बाजार में चिंता का माहौल बन गया है। डॉलर के मुकाबले सोना करीब 19 फीसदी तक फिसल चुका है, जबकि चांदी अपने उच्चतम स्तर से लगभग 40 फीसदी नीचे आ गई है। इसी दौरान भारतीय शेयर बाजार भी दबाव में नजर आया है और सेंसेक्स-निफ्टी 2026 में अब तक करीब 5 फीसदी गिर चुके हैं।
सोमवार, 2 फरवरी 2026 को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर गिरावट और गहराती दिखी। सोने के अप्रैल वायदा भाव लगभग 6 फीसदी टूटकर 1,38,888 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गए। वहीं चांदी में भारी बिकवाली देखने को मिली और यह 12 फीसदी के लोअर सर्किट तक लुढ़क गई। एक ही सत्र में चांदी के दामों में करीब 40 हजार रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई। कुछ दिन पहले ही चांदी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंची थी, लेकिन तेज मुनाफावसूली ने बाजार की दिशा पलट दी।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट की शुरुआत अमेरिका से आए संकेतों के बाद हुई। फेडरल रिजर्व में संभावित बदलाव, मजबूत डॉलर, बढ़ती ट्रेजरी यील्ड और महंगाई से जुड़े आंकड़ों ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंजों पर मार्जिन बढ़ने से लीवरेज्ड ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन काटनी पड़ी, जिससे बिकवाली और तेज हो गई।
भारत में बजट के बाद आयात शुल्क में कोई बदलाव न होने से सोने पर मिलने वाला प्रीमियम भी खत्म हो गया, जिससे घरेलू कीमतों को सहारा नहीं मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्तरों पर निवेशकों को जल्दबाजी से बचना चाहिए। बाजार अभी समेकन के दौर में जा सकता है और आगे की दिशा वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी।
निवेश सलाहकारों का कहना है कि सोना-चांदी को पोर्टफोलियो में संतुलन के तौर पर रखना ठीक है, लेकिन इन परिसंपत्तियों में अकेले या आक्रामक निवेश से फिलहाल बचना चाहिए। अनुशासित निवेश और सही एसेट एलोकेशन ही इस अस्थिर दौर में बेहतर रणनीति मानी जा रही है।







