
नयी दिल्ली: भगोड़े हीरा कारोबारी Nirav Modi ने भारत प्रत्यर्पण से बचने के लिए एक बार फिर कानूनी दांव चला है। 54 वर्षीय मोदी ने High Court of Justice में अपने प्रत्यर्पण मामले को दोबारा खोलने की अनुमति मांगी है। इस बार उनका मुख्य तर्क यह है कि भारत लौटने पर उन्हें “अमानवीय व्यवहार और यातना” का वास्तविक खतरा है।
लंदन स्थित Royal Courts of Justice में लॉर्ड जस्टिस जेरेमी स्टुअर्ट-स्मिथ और जस्टिस रॉबर्ट जे की पीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई पूरी कर ली है और फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान मोदी HM Prison Pentonville से वीडियो लिंक के जरिए पेश हुए। अदालत ने मामले को बेहद अहम बताते हुए संकेत दिया कि निर्णय जल्द सुनाया जाएगा।
मोदी की ओर से वरिष्ठ वकील एडवर्ड फिट्जगेराल्ड KC ने दलील दी कि भारत में जांच एजेंसियों की पूछताछ के दौरान उनके साथ अमानवीय व्यवहार हो सकता है। बचाव पक्ष ने भारत सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों को “अपर्याप्त और अविश्वसनीय” बताते हुए कहा कि उन्हें मुंबई की Arthur Road Jail से अन्य स्थानों पर ले जाकर अलग-अलग एजेंसियों द्वारा पूछताछ की जा सकती है।
दूसरी ओर, भारत सरकार का पक्ष रखते हुए Crown Prosecution Service ने इस अर्जी का कड़ा विरोध किया। अभियोजन पक्ष ने इसे देर से दायर और कमजोर आधार पर टिकी याचिका बताया। उनका कहना है कि भारत ने पर्याप्त सुरक्षा आश्वासन दिए हैं और इस हाई-प्रोफाइल केस में किसी भी उल्लंघन की संभावना बेहद कम है।
गौरतलब है कि मोदी Punjab National Bank से जुड़े करीब 2 अरब डॉलर के घोटाले के मुख्य आरोपी हैं। अगर अदालत इस याचिका को खारिज करती है, तो उनके भारत प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो सकता है, जहां उन्हें सीबीआई और ईडी के मामलों में ट्रायल का सामना करना होगा।






