ओडिशा: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने पैतृक गांव के दौरे के दौरान भावुक हो गईं। ओडिशा के मयूरभंज जिले में स्थित अपने गांव पहुंचते ही उन्होंने बचपन की यादों और अपने जीवन के शुरुआती संघर्षों को याद किया। गांव के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ राष्ट्रपति का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने ग्रामीणों से मुलाकात की, उनके हालचाल पूछे और विकास से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की।
अपने दौरे के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि यह भूमि उनके जीवन की जड़ों से जुड़ी है और यहां आकर उन्हें हमेशा आत्मीयता और अपनापन महसूस होता है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि गांवों के समग्र विकास से ही देश की प्रगति संभव है। राष्ट्रपति के भावुक क्षणों को देखकर ग्रामीण भी अभिभूत नजर आए।
पैतृक गांव के दौरे के बाद राष्ट्रपति मुर्मू सिमिलिपाल जंगल में रात्रि विश्राम करेंगी। सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। राष्ट्रपति का यह प्रवास न केवल निजी बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी संस्कृति के प्रति उनके जुड़ाव को भी दर्शाता है। वे यहां वन अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन के साथ वन संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर सकती हैं।
राष्ट्रपति के दौरे को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने पूरे इलाके में सतर्कता बढ़ा दी है और स्थानीय लोगों से सहयोग की अपील की है। सिमिलिपाल में उनके रात्रि प्रवास के दौरान पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों की भी जानकारी ली जाएगी।
राष्ट्रपति मुर्मू का यह दौरा प्रतीकात्मक रूप से भी अहम माना जा रहा है। एक आदिवासी परिवार से देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचने वाली राष्ट्रपति का अपने गांव लौटना प्रेरणादायक संदेश देता है। यह दौरा न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत यात्रा को दर्शाता है, बल्कि ग्रामीण भारत, प्रकृति और परंपराओं से उनके गहरे जुड़ाव को भी उजागर करता है।







