मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के वरिष्ठ नेता बाला नंदगांवकर ने गुरुवार को बड़ा बयान देते हुए कहा कि शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे के बीच लगातार बातचीत चल रही है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि उनकी पार्टी औपचारिक तौर पर इन चर्चाओं का हिस्सा नहीं है। बाला नंदगांवकर ने कहा, ‘दोनों नेता आपस में जरूर चर्चा कर रहे हैं।’ लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि बैठकों में किन मुद्दों पर बात हुई। बुधवार को उद्धव ठाकरे, मुंबई के दादर स्थित राज ठाकरे के घर ‘शिवतीर्थ’ पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच लगभग ढाई घंटे तक मुलाकात चली। यह पिछले दो हफ्तों में उनकी दूसरी औपचारिक मुलाकात थी।
इससे पहले जुलाई में, उद्धव और राज ठाकरे एक ही मंच पर नजर आए थे जब राज्य सरकार को कक्षा 1 से 5 तक के लिए तीन भाषा फार्मूला वापस लेना पड़ा था। जुलाई के आखिर में राज ठाकरे, उद्धव को जन्मदिन की शुभकामनाएं देने ‘मातोश्री’ (उद्धव का निवास) भी गए थे। इसके बाद से उनकी मुलाकातों का सिलसिला बढ़ गया है। इन मुलाकातों ने राजनीतिक हलकों में कयास तेज कर दिए हैं कि उद्धव और राज ठाकरे स्थानीय निकाय चुनावों, खासकर बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) चुनाव से पहले साथ आने की तैयारी कर रहे हैं। 2024 के विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियों को करारी हार का सामना करना पड़ा था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह हार ही दोनों को एकजुट होने की दिशा में सोचने के लिए मजबूर कर रही है। जब बाला नंदगांवकर से पूछा गया कि क्या मनसे, महा विकास आघाड़ी (एमवीए)- जिसमें कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरद पवार गुट) शामिल हैं- का हिस्सा बनेगी, तो उन्होंने कहा, ‘इस पर फैसला पार्टी हाईकमान लेगा।
अलग-अलग पार्टियों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है। राज ठाकरे सभी पहलुओं पर विचार कर आगे की रणनीति तय करेंगे।’ उन्होंने यह भी बताया कि राज ठाकरे ने मनसे के कुछ नेताओं को बुलाकर नागरिक चुनावों को लेकर उनकी राय जानी है। उद्धव-राज की बढ़ती नजदीकियों पर महाराष्ट्र बीजेपी के मीडिया प्रमुख नवनाथ बान ने तंज कसा। उन्होंने कहा, ‘यह मुलाकात शायद राम और भरत जैसी हो सकती है, जहां राम ने भरत को अपनी जगह राज करने का अधिकार दिया था। या फिर यह महाभारत के कौरव और पांडव जैसी भी हो सकती है, जहां पांडव अपना हक मांगने के लिए तैयार थे।’ उन्होंने कहा कि संजय राउत को इस तुलना पर जवाब देना चाहिए। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने हालांकि राजनीतिक अटकलों को खारिज किया। उन्होंने कहा, ‘उद्धव और राज ठाकरे चचेरे भाई हैं। उनका आपस में मिलना स्वाभाविक है। यह पूरी तरह निजी मुलाकात थी, इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।’







