नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने श्रीनगर स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) के गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की पदोन्नति और वेतनमान से जुड़े मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को नौ माह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि संस्थान का बोर्ड ऑफ गवर्नर्स इस मामले में सैद्धांतिक निर्णय ले चुका है, इसलिए अब मंत्रालय को इस पर विचार कर फैसला करना है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने नेहा रतूड़ी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। इसके साथ ही अदालत ने याचिका का निस्तारण कर दिया।
समान वेतनमान और पदोन्नति की मांग
याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि एनआईटी श्रीनगर के गैर-शैक्षणिक उच्च तकनीकी कर्मचारियों का वेतनमान वर्ष 2019 के भर्ती नियमों के अनुसार निर्धारित किया जाए। उनका तर्क था कि अन्य एनआईटी में समान पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के अनुरूप वेतन और सेवा संबंधी लाभ मिलने चाहिए।
याचिका में पात्रता की तिथि से पूर्वव्यापी प्रभाव के आधार पर पदोन्नति देने और उससे जुड़े वित्तीय व अन्य परिणामी लाभ उपलब्ध कराने की मांग भी की गई थी। इसके तहत भर्ती नियमों के अनुसार लेवल-9 वेतनमान दिए जाने का अनुरोध किया गया। याचिकाकर्ताओं ने मामले के अंतिम निस्तारण तक गैर-शैक्षणिक पदों पर अन्य नियुक्तियों और पदोन्नति की प्रक्रिया रोकने की मांग भी उठाई थी।
बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने लिया था सैद्धांतिक निर्णय
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पदोन्नति के पर्याप्त अवसर नहीं मिलने के कारण कर्मचारी लंबे समय से ठहराव का सामना कर रहे थे। इस संबंध में संस्थान के सक्षम प्राधिकारी को प्रत्यावेदन दिया गया था, जिसकी जांच एक समिति ने की थी।
इसके बाद मामला बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक में रखा गया। बोर्ड ने गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के उच्चीकरण को उनकी फीडिंग कैडर में पात्रता की तिथि से लागू करने और संबंधित पद के पुनर्जीवन को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इस प्रस्ताव को आगे की कार्रवाई के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय भेजने का निर्णय भी लिया गया था।
प्रमाणित आदेश मिलने के बाद नौ माह की समयसीमा
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के सचिव अदालत के आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किए जाने की तिथि से नौ माह के भीतर मामले पर निर्णय लें। अब कर्मचारियों की पदोन्नति, वेतनमान और संबंधित लाभों को लेकर मंत्रालय के फैसले पर नजर रहेगी।







