नयी दिल्ली: डिजिटल पेमेंट के बढ़ते उपयोग के साथ UPI के जरिए लेनदेन आज आम हो चुका है, लेकिन कई बार छोटी सी गलती भारी पड़ जाती है। गलत मोबाइल नंबर, UPI आईडी या खाते में पैसा ट्रांसफर हो जाना एक आम समस्या बनती जा रही है। साइबर एक्सपर्ट रितेश कुमार का कहना है कि ऐसे मामलों में घबराने के बजाय तुरंत सही कदम उठाना बेहद जरूरी है। समय पर की गई शिकायत से न सिर्फ ट्रांजैक्शन को ट्रैक किया जा सकता है, बल्कि कई मामलों में रकम वापस भी मिल सकती है।
रितेश कुमार के अनुसार, जैसे ही गलत खाते में पैसा ट्रांसफर होने का पता चले, सबसे पहले अपने बैंक और संबंधित पेमेंट ऐप में शिकायत दर्ज करनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर, यदि ट्रांजैक्शन Google Pay, PhonePe या Paytm के माध्यम से हुआ है, तो ऐप के ‘Help’ या ‘Support’ सेक्शन में जाकर तुरंत रिपोर्ट करें। इसके साथ ही बैंक की कस्टमर केयर से संपर्क कर ट्रांजैक्शन आईडी साझा करें।
उन्होंने बताया कि यदि ऐप या बैंक से त्वरित समाधान नहीं मिलता है, तो 1930 साइबर हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। यह हेल्पलाइन डिजिटल फ्रॉड और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन से जुड़े मामलों में तुरंत कार्रवाई के लिए बनाई गई है। इसके अलावा National Payments Corporation of India (NPCI) के ग्रिवांस पोर्टल पर भी ऑनलाइन शिकायत की जा सकती है। NPCI ही देश में UPI सिस्टम का संचालन करती है, इसलिए यहां दर्ज शिकायत पर संबंधित बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को तुरंत अलर्ट भेजा जाता है।
साइबर एक्सपर्ट रितेश कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि तेजी से शिकायत करने पर कई मामलों में रिसीवर का अकाउंट अस्थायी रूप से फ्रीज कर दिया जाता है। इससे रकम को सुरक्षित रखने और रिवर्सल प्रक्रिया शुरू करने में मदद मिलती है। हालांकि, यदि सामने वाला व्यक्ति पैसे निकाल चुका हो तो प्रक्रिया लंबी हो सकती है और बैंक की जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाता है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि ट्रांजैक्शन करते समय UPI आईडी और नाम को दोबारा जांचें, ‘Verify’ विकल्प का उपयोग करें और जल्दबाजी से बचें। साथ ही, किसी भी संदिग्ध कॉल या लिंक पर क्लिक करने से बचें। जागरूकता और सतर्कता ही डिजिटल लेनदेन में सुरक्षा की सबसे बड़ी कुंजी है।







