
नई दिल्ली: केंद्र सरकार नकली और अधोमानक कीटनाशकों के कारोबार पर सख्त लगाम लगाने की तैयारी में है। कृषि मंत्रालय ने कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2025 का मसौदा तैयार किया है, जिसके तहत ऐसे कीटनाशकों का निर्माण, बिक्री, आयात या भंडारण करने वालों को कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित कानून के अनुसार दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल या 10 लाख से 40 लाख रुपये तक का जुर्माना अथवा दोनों सजाएं दी जा सकती हैं। यदि नकली कीटनाशक के कारण किसी व्यक्ति की मृत्यु या गंभीर चोट होती है तो सजा और भी कठोर होगी—ऐसे मामलों में पांच साल तक की कैद और 10 लाख से 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
मसौदे में यह भी प्रावधान है कि सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने या बिना लाइसेंस कारोबार करने पर 50 हजार से दो लाख रुपये तक का जुर्माना लगेगा। जुर्माने की अंतिम राशि तय करने और उसमें बदलाव करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास रहेगा। सरकार ने इस विधेयक पर 4 फरवरी तक आम जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं।
नए कानून के तहत कीटनाशक परीक्षण प्रयोगशालाओं का अनिवार्य एक्रीडिटेशन किया जाएगा, ताकि बाजार में केवल गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित उत्पाद ही उपलब्ध हों। केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड और पंजीकरण समिति का गठन कर प्रवर्तन तंत्र को मजबूत किया जाएगा। मसौदे में लाइसेंसिंग, लेबलिंग, सुरक्षित निपटान और दंडात्मक प्रावधानों पर विशेष जोर दिया गया है।
विधेयक का उद्देश्य किसानों को असली और प्रभावी कीटनाशक उपलब्ध कराना, हानिकारक रसायनों के प्रयोग को रोकना और कृषि उत्पादन में सुधार लाना है। इसके साथ ही पर्यावरण और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाएगी। निर्माताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं के लिए अनिवार्य लाइसेंसिंग तथा पंजीकरण की व्यवस्था लागू होगी, जिससे अवैध कारोबार पर रोक लग सकेगी और कीटनाशक क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी।






