
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलमार्ग से गैस सप्लाई प्रभावित होने के बाद देश में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की भारी किल्लत सामने आई है। हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने देशभर में एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 लागू कर दिया है, ताकि जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाई जा सके। गैस की कमी के चलते दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई पर फिलहाल रोक या भारी कटौती कर दी गई है। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और छोटे भोजनालयों पर पड़ा है। कई जगहों पर होटल संचालकों का कहना है कि अगर जल्द सप्लाई बहाल नहीं हुई तो उन्हें अपने प्रतिष्ठान बंद करने पड़ सकते हैं।
उत्तर प्रदेश में कॉमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई पर अघोषित रोक से होटल और ढाबा संचालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लखनऊ, कानपुर और वाराणसी जैसे शहरों में बुकिंग के चार से पांच दिन बाद भी गैस सिलेंडर की डिलीवरी नहीं हो पा रही है। वहीं मध्य प्रदेश में होटल संचालकों का कहना है कि बढ़ी हुई कीमत चुकाने के बावजूद सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं, जिससे शादी के सीजन में कारोबार प्रभावित हो रहा है। राजस्थान में होटल और रेस्टोरेंट संचालकों ने कहा कि गैस का कोई विकल्प नहीं है, इसलिए सप्लाई रुकने से पूरे होटल उद्योग पर संकट खड़ा हो गया है। छत्तीसगढ़ में डीलर्स को अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को छोड़कर अन्य जगहों पर कॉमर्शियल सिलेंडर देने से मना कर दिया गया है।
महाराष्ट्र में मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे शहरों में कॉमर्शियल गैस की भारी कटौती की गई है। पुणे में स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि नगर निगम को गैस आधारित शवदाह गृह अस्थायी रूप से बंद करने पड़े। अनुमान है कि राज्य के करीब 9,000 रेस्टोरेंट और बार पर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। दरअसल, एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 सरकार को यह अधिकार देता है कि वह जरूरी वस्तुओं की सप्लाई और कीमतों को नियंत्रित कर सके। इस कानून के तहत व्यापारियों के लिए स्टॉक की सीमा तय की जाती है, ताकि जमाखोरी रोकी जा सके और आम लोगों तक जरूरी सामान की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। फिलहाल सरकार का फोकस घरेलू गैस सिलेंडरों की सप्लाई बनाए रखने पर है, जबकि कॉमर्शियल गैस की किल्लत से कारोबारी वर्ग परेशान है।






