हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश के मंडी और चंबा जिले में फिर बादल फटने से 50 बीघा जमीन और पांच पुल बह गए। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में अलकनंदा ने रौद्र रूप ले लिया है। नदी किनारे स्थापित भगवान शिव की मूर्ति डूब गई है। टनकपुर—लिपुलेख मार्ग पर भूस्खलन के कारण कैलाश मानसरोवर यात्रा भी कुछ देर बाधित रही।हिमाचल प्रदेश में रेड अलर्ट के बीच चंबा, मंडी और कांगड़ा जिलों में भारी बारिश हुई। हमीरपुर में एक महिला खड्ड में बह गई। देर शाम तक उसका कोई सुराग नहीं लग पाया था। मंडी में शनिवार देर रात बादल फटने से तीन पैदल पुल और एक वाहन पुल बह गया।चंबा के चुराह उपमंडल में रविवार सुबह करीब नौ बजे बादल फटने से कठवाड़ नाले में अचानक बाढ़ आ गई, जिसमें एक पुल बहने से तीन पंचायतों का संपर्क चुराह उपमंडल से कट गया है। कांगड़ा में जवाली के लब-लुधियाड़-भरमाड़ मार्ग पर सिद्धपुरघाड़ में निर्मित पुल का एक छोर धंसने से सड़क बंद हो गई। ऊना के गगरेट औद्योगिक क्षेत्र में एक कंपनी में जलभराव से फंसे 45 कर्मियों को किसी तरह निकाला गया।
मंडी जिले में बीते मंगलवार को बादल फटने से तलवारा गांव में पूरा परिवार बह गया, उसमें 10 माह की बच्ची नीतिका ही बची है। हिमाचल में बारिश, बाढ़ और बादल फटने से अब तक 78 लोगों की मौत हो चुकी है और 37 से अधिक लापता हैं। कुल्लू में शनिवार को वाहन के फिसलकर खड्ड में गिरने से चार लोगों की जान चली गई और एक घायल हो गया। राज्य में रविवार को भी 243 सड़कें अवरुद्ध रहीं। बिजली के 244 ट्रांसफार्मर और 278 जलापूर्ति योजनाएं प्रभावित रहीं।
उत्तराखंड में टनकपुर-तवाघाट-लिपुलेख सड़क तवाघाट के पास भारी बोल्डर और मलबा आने से बंद हो गई। इससे कैलाश मानसरोवर यात्रियों सहित स्थानीय लोग फंसे रहे। छह घंटे बाद बीआरओ ने सड़क खोलकर यातायात सुचारु किया। दारमा घाटी को जोड़ने वाली तवाघाट-सोबला-ढाकर सड़क छिरकिला डैम के पास बोल्डर आने से बंद हो गई। भारी बारिश से यमुनोत्री राजमार्ग 10 दिनों से बंद है। जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश के चलते राजोरी में धरहाली व सकटोह नदियों का जल स्तर बढ़ गया है। कटड़ा में शनिवार रात हिमकोटी मार्ग पर पहाड़ी से पत्थर गिरने से माता वैष्णो देवी यात्रा रोक दी गई थी, जिसे सुबह चालू किया गया। हालांकि, धुंध के कारण हेलिकॉप्टर सेवा आंशिक रूप से ही बहाल हो सकी।







