नयी दिल्ली: केंद्रीय बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन को नई दिशा देने का बड़ा ऐलान किया है। बजट में 15 प्रमुख पुरातात्विक और विरासत स्थलों को “जीवंत सांस्कृतिक स्थलों” के रूप में विकसित करने की योजना पेश की गई है। इसका उद्देश्य पारंपरिक दर्शनीय पर्यटन से आगे बढ़कर अनुभव-आधारित पर्यटन को बढ़ावा देना है, ताकि भारत की सभ्यतागत विरासत को न सिर्फ संरक्षित किया जा सके, बल्कि उसे देश-विदेश के पर्यटकों के लिए अधिक आकर्षक और उपयोगी बनाया जा सके।
विकास के लिए जिन स्थलों को चुना गया है, उनमें रायगिरी, लोथल, सारनाथ और हस्तिनापुर जैसे ऐतिहासिक नाम शामिल हैं। इन स्थानों पर आधुनिक पर्यटक बुनियादी ढांचे, इंटरप्रिटेशन सेंटर, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, डिजिटल गाइड और बेहतर कनेक्टिविटी पर खास जोर दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि ये स्थल केवल पत्थर के स्मारक न रहकर इतिहास और संस्कृति की जीवंत कहानियां बनें, जहां पर्यटक भारत की विरासत को महसूस कर सकें।
इस पहल से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। होटल, गाइड, हस्तशिल्प, परिवहन और स्थानीय व्यवसायों को इससे सीधा लाभ मिलेगा, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। साथ ही, विरासत संरक्षण को भी संस्थागत समर्थन मिलेगा।
बजट में बौद्ध सर्किट के विकास को भी अहम स्थान दिया गया है। आंध्र प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम और त्रिपुरा में बौद्ध परंपराओं से जुड़े स्थलों को जोड़कर एक मजबूत बौद्ध परिपथ विकसित किया जाएगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके।
पर्यटन को रोजगार और विकास रणनीति के केंद्र में रखते हुए वित्त मंत्री ने एक राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा। इसके अलावा, आईआईएम के सहयोग से 12 सप्ताह के विशेष कार्यक्रम के तहत देश के 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों पर 10,000 पर्यटक गाइडों को प्रशिक्षित किया जाएगा। कुल मिलाकर बजट 2026 पर्यटन को आर्थिक विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और रोजगार सृजन का मजबूत माध्यम बनाने की दिशा में अहम कदम साबित होता दिख रहा है।







