राजस्थान: जयपुर में मस्जिदों के लाउडस्पीकरों की आवाज़ से बच्चों की पढ़ाई और स्थानीय निवासियों की नींद प्रभावित होने का मुद्दा भाजपा विधायक बालमुकुंदाचार्य ने विधानसभा में उठाया। गुरुवार को शून्यकाल के दौरान उन्होंने कहा कि जयपुर शहर की मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकरों की तेज आवाज़ सुबह 4 बजे से ही शुरू हो जाती है, जिससे बच्चों की पढ़ाई में खलल पड़ता है और बुजुर्गों तथा बीमार लोगों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर होता है। उन्होंने इसे नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन बताया और सरकार से इसे नियंत्रित करने की सख्त कार्रवाई करने की मांग की।
बालमुकुंदाचार्य ने बताया कि स्थानीय निवासियों ने कई बार मस्जिदों से निकलने वाली तेज आवाज़ कम करने का अनुरोध किया, लेकिन कुछ मामलों में विरोध हिंसक रूप ले चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि ध्वनि प्रदूषण के कारण लोगों की नींद बुरी तरह प्रभावित हो रही है और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। विधायक ने मस्जिदों में ध्वनि सीमा तय करने और उसके पालन की प्रक्रिया को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस मुद्दे के उठने से पहले राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने आगामी बजट सत्र से पहले 27 जनवरी को सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। उन्होंने सदन के सुचारू संचालन और रचनात्मक बहस सुनिश्चित करने पर जोर दिया। अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने विभिन्न दलों के नेताओं से व्यक्तिगत रूप से चर्चा की और आम सहमति बनाने के लिए बैठक बुलाई है। उन्होंने यह भी कहा कि बजट सत्र के दौरान सार्वजनिक मुद्दों पर सार्थक बहस और सुझावों की आवश्यकता है और सदन के नियमों के अनुसार किसी भी बहस को रोका नहीं जाएगा।
बालमुकुंदाचार्य का यह मुद्दा राज्य में नागरिकों के अधिकार, ध्वनि प्रदूषण और बच्चों की शिक्षा से जुड़े संवेदनशील पहलुओं को उजागर करता है। यह मामला अब विधानसभा और सरकार की कार्रवाई के लिए सुर्खियों में है, जिससे स्थानीय प्रशासन और धार्मिक संस्थाओं के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण बन गया है।







